Thursday, October 8, 2026
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DGP नियुक्ति विवाद पर SC में कल होगी सुनवाई, नियमावली के दो प्रावधान कटघरे में

by उर्वशी शेखर
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झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 22 सितंबर 2026 को अहम सुनवाई होगी। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ करेगी। सुप्रीम कोर्ट की 22 सितंबर की कॉज लिस्ट में भी यही पीठ दर्ज है।

यह मामला मुख्य रूप से झारखंड सरकार की डीजीपी चयन एवं नियुक्ति नियमावली की वैधता से जुड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्य की संशोधित नियुक्ति व्यवस्था को चुनौती दी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को हाईकोर्ट से अपने पास मंगा लिया।

नियुक्ति नियमों पर सुप्रीम कोर्ट में बहस

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत की सहायता के लिए नियुक्त Amicus Curiae ने डीजीपी नियुक्ति नियमावली की समीक्षा कर अपनी राय अदालत के समक्ष रखी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, Amicus Curiae ने नियमावली के दो प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट की ओर से डीजीपी नियुक्ति को लेकर तय सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना है।

अब सुनवाई में झारखंड सरकार को इन आपत्तियों पर अपना पक्ष रखना है। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि राज्य की नियुक्ति व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्धारित मानकों के अनुरूप है या उसमें बदलाव की जरूरत है।

तदाशा मिश्रा की नियुक्ति भी बनी विवाद का केंद्र

मामले में मौजूदा डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट को सौंपे गए एमिकस क्यूरी के नोट में उनकी नियुक्ति के समय शेष सेवा अवधि को लेकर आपत्ति दर्ज की गई है। तदाशा मिश्रा को 30 दिसंबर 2025 को डीजीपी नियुक्त किया गया था, जबकि उनकी सेवानिवृत्ति अगले ही दिन निर्धारित थी। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों में डीजीपी पद पर नियुक्ति के समय अधिकारी के पास कम से कम छह महीने की सेवा शेष रहने का मानक बताया गया है।

अब 22 सितंबर की सुनवाई में राज्य सरकार की दलीलों और एमिकस क्यूरी की राय पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही, झारखंड की डीजीपी नियुक्ति नियमावली के उन प्रावधानों पर भी सुनवाई होगी, जिनकी वैधानिकता और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों से संगति पर सवाल उठाए गए हैं।

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