Wednesday, October 7, 2026
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भर्ती परीक्षाओं पर रोक बरकरार! HC ने कहा-एक आदेश से पक्की नौकरी नहीं छीनी जा सकती

by उर्वशी शेखर
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झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने जेएसएससी-सीजीएल (विज्ञापन संख्या 10/2023) समेत कई भर्ती परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर लगी अंतरिम रोक को जारी रखा। मामले में अगली सुनवाई अब 7 अक्टूबर को होगी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपना शपथ पत्र अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। इस पर अपना पक्ष रखने के लिए याचिकाकर्ताओं ने अतिरिक्त समय की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। यह मामला आकाश गौरव व अन्य तथा निरोज खेस व अन्य की ओर से दाखिल याचिकाओं समेत कई संबंधित याचिकाओं से जुड़ा है।

पक्की नियुक्तियों पर अदालत की अहम टिप्पणी

अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सिर्फ एक अधिसूचना जारी करके उन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त नहीं की जा सकतीं, जिन्हें पहले ही नियमित नियुक्ति मिल चुकी है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच में सामने आए तथ्यों से पहली नजर में यह संकेत जरूर मिलता है कि भर्ती की पूरी प्रक्रिया में हर नियुक्ति को पूरी तरह निर्विवाद नहीं माना जा सकता। लेकिन उपलब्ध सामग्री के आधार पर सभी नियुक्तियों को एक ही नजर से देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि हर नियुक्ति में अनियमितता हुई है।

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि जेपीएससी की एक परीक्षा से लेकर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने तक सामान्य तौर पर दो से तीन वर्ष का समय लग सकता है। सरकार का कहना था कि करीब 2,700 नियुक्तियों को एक साथ निरस्त करने का असर बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों पर पड़ेगा।

मामले की जांच की निगरानी के लिए हाईकोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आरके मल्लिक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन के साथ अधिवक्ता श्रेय मिश्रा, इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने अदालत में पक्ष रखा। सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहिताश्य राय तथा वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने दलीलें पेश कीं।

सरकार ने SC के फैसलों का दिया हवाला

राज्य सरकार ने अपने जवाब में जेएसएससी-सीजीएल को रद्द करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में तय कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप बताया है। कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव अमर कुमार द्वारा दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि कथित अनियमितताओं के कारण परीक्षा की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई थी।

सरकार का तर्क है कि ऐसी स्थिति में यह अलग करना बेहद कठिन हो जाता है कि किन अभ्यर्थियों ने निष्पक्ष तरीके से सफलता हासिल की और किन्हें गड़बड़ी के माध्यम से अनुचित लाभ मिला। इसी आधार पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी भर्ती प्रक्रिया का व्यापक स्तर पर दूषित होना सामने आए और निष्पक्ष तथा अनुचित तरीके से चयनित उम्मीदवारों की पहचान अलग-अलग करना संभव न हो, तो पूरी परीक्षा निरस्त की जा सकती है। इसी संदर्भ में हलफनामे में वानशिखा बनाम केंद्र सरकार मामले का भी हवाला दिया गया है।

गोपनीय परीक्षा कार्य में लगी एजेंसी पर गंभीर आरोप

सरकार के अनुसार, सीजीएल परीक्षा से जुड़े संवेदनशील और गोपनीय कार्यों की जिम्मेदारी आईसीएन टेक्नोलॉजी को दी गई थी। इसमें प्रश्नपत्रों की छपाई से लेकर उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं।

परीक्षा में कथित धांधली की जांच के दौरान कंपनी के सीईओ सोमांश प्रकाश सहित 28 लोगों की गिरफ्तारी का उल्लेख सरकार ने अपने शपथ पत्र में किया है। जांच अभी जारी है और इस मामले में 265 लोगों को नोटिस भी जारी किए गए हैं।

सरकार का दावा है कि जांच के दौरान परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी की भूमिका को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के संकेत मिले। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों को पैसे के बदले परीक्षा में आने वाले प्रश्नों के उत्तर पहले से याद करवाए गए और उन्हें अनुचित लाभ दिलाने की व्यवस्था की गई।

जांच में नेपाल के अलावा आसनसोल, कोलकाता, बिहार, झरिया और बोकारो से भी ऐसे मामलों की जानकारी मिलने की बात सरकार ने कही है। हलफनामे में दावा किया गया है कि नेपाल में कथित तौर पर उत्तर याद करवाए गए 28 उम्मीदवारों में से 10 बाद में सीजीएल परीक्षा में सफल हुए।

नियुक्ति पत्र में पहले ही जोड़ दी गई थी जांच की शर्त

सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि सीजीएल में चयनित उम्मीदवारों को दिए गए नियुक्ति पत्र में यह स्पष्ट किया गया था कि उनकी नियुक्ति सीआईडी जांच के नतीजे के अधीन रहेगी।

सरकार के मुताबिक, जांच आगे बढ़ने के साथ जब पूरी परीक्षा प्रक्रिया के प्रभावित होने के तथ्य सामने आए, तब निष्पक्ष तरीके से सफल अभ्यर्थियों और कथित रूप से अनुचित लाभ लेने वालों को अलग-अलग चिन्हित करना मुश्किल पाया गया। इसके बाद मंत्रिमंडल ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया और उसी के आधार पर संबंधित आदेश जारी किया गया।

22 परीक्षाएं निरस्त, 6 पर रोक और 17 जांच के घेरे में

सीआईडी की जांच में सामने आए तथ्यों के बाद राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात जेएसएससी-सीजीएल सहित कई भर्ती परीक्षाओं को निरस्त करने की घोषणा की थी। इसके साथ ही 2014 के बाद आयोजित विभिन्न नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित गड़बड़ियों की भी जांच कराने का निर्णय लिया गया।

बाद में कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने इस संबंध में अधिसूचनाएं जारी कीं। सरकारी आदेश के तहत 22 परीक्षाएं रद्द, 6 भर्ती प्रक्रियाएं स्थगित और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया है।

अब हाईकोर्ट के समक्ष मुख्य सवाल यह है कि व्यापक स्तर पर सामने आई कथित अनियमितताओं के आधार पर पूरी भर्ती प्रक्रिया को किस हद तक रद्द किया जा सकता है और पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों के अधिकारों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी।

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