Wednesday, October 7, 2026
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₹2,000 से ऊपर UPI पेमेंट पर 0.4% MDR, राहुल गांधी ने सरकार को घेरा; जानिए क्या बदला

by उर्वशी शेखर
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देश में डिजिटल भुगतान के सबसे बड़े माध्यम UPI के शुल्क ढांचे में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने का ऐलान किया है। हालांकि, यह शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन के लिए MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है।

इस फैसले ने राजनीतिक बहस भी तेज कर दी है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के कदम पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि बड़े UPI लेन-देन पर शुल्क लगाने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है। उन्होंने इसे अमेरिकी भुगतान कंपनियों के कथित दबाव से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप है; सरकार की ओर से जारी स्पष्टीकरण में MDR व्यवस्था को UPI इकोसिस्टम की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता से जोड़ा गया है।

आम UPI यूजर पर क्या असर पड़ेगा?

नई व्यवस्था का दायरा सभी UPI भुगतानों तक नहीं है। किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को किया गया UPI ट्रांसफर पहले की तरह मुफ्त रहेगा। इसी तरह ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान भी शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे। वित्त मंत्रालय के अनुसार, छोटे व्यापारियों के लिए लागू मौजूदा जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले लेन-देन भी प्रभावित नहीं होंगे। सरकार का अनुमान है कि करीब 96 प्रतिशत P2M ट्रांजैक्शन पर इस बदलाव का कोई असर नहीं पड़ेगा।

किसे देना होगा MDR?

नया शुल्क मुख्य रूप से ₹2,000 से अधिक के निर्दिष्ट Person-to-Merchant भुगतान पर लागू होगा। सामान्य श्रेणी में दर 0.4 प्रतिशत रखी गई है। उदाहरण के तौर पर ₹10,000 के पात्र व्यापारी UPI भुगतान पर MDR ₹40 होगा। वहीं ₹75,000 या उससे अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत के हिसाब से राशि बढ़ने के बजाय शुल्क ₹300 पर सीमित हो जाएगा।

कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। रेलवे, दूरसंचार, बीमा और ईंधन जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से ऊपर के पात्र भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है।

छोटे दुकानदारों को राहत

नई व्यवस्था में छोटे कारोबारियों को अतिरिक्त बोझ से बचाने के लिए छूट का प्रावधान भी है। सरकार के अनुसार, कम मूल्य वाले भुगतान और छोटे व्यापारियों से जुड़े निर्धारित लेन-देन शुल्क-मुक्त रहेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रोजमर्रा के छोटे डिजिटल भुगतान पर नई व्यवस्था का व्यापक असर न पड़े।

सरकार और राहुल गांधी के दावों में क्या अंतर है?

राहुल गांधी का तर्क है कि भले ही ग्राहक से सीधे कोई शुल्क न लिया जाए, लेकिन व्यापारी पर आने वाली लागत आगे चलकर सामान या सेवाओं की कीमतों में शामिल हो सकती है। इसलिए उनका सवाल है कि वास्तविक आर्थिक बोझ अंततः किस पर पड़ेगा।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि MDR ग्राहक से वसूल किया जाने वाला UPI ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं है। सरकार के मुताबिक यह राशि भुगतान व्यवस्था में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और अन्य भागीदारों के बीच वितरित होगी, ताकि UPI के संचालन और विस्तार की लागत को टिकाऊ तरीके से पूरा किया जा सके।

अमेरिकी दबाव के आरोप पर स्थिति

राहुल गांधी ने इस बदलाव को अमेरिकी भुगतान कंपनियों के कथित दबाव से जोड़ते हुए केंद्र पर हमला किया है। हालांकि, यह राजनीतिक आरोप है। NPCI और सरकार की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी में MDR लागू करने की वजह के तौर पर UPI के इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा, सेवा लागत और दीर्घकालिक स्थिरता जैसे पहलुओं को रेखांकित किया गया है।

UPI ने पिछले वर्षों में भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र को व्यापक रूप से बदल दिया है। अब बड़े व्यापारी भुगतानों पर MDR लागू होने के साथ बहस इस बात पर केंद्रित है कि इसका कारोबार, पेमेंट कंपनियों और बाजार में कीमतों पर वास्तविक प्रभाव कितना होगा। नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने के बाद इसके व्यावहारिक असर का आकलन अधिक स्पष्ट रूप से किया जा सकेगा।

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