भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट की पुरानी प्रतिद्वंद्विता को फिर से मैदान पर उतारने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से बंद द्विपक्षीय क्रिकेट के बावजूद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) एक ऐसे प्रारूप पर विचार कर रही है, जिसके जरिए दोनों टीमों को एक ही प्रतियोगिता में शामिल किया जा सके। इस प्रस्ताव पर 22 और 23 सितंबर को दुबई में होने वाले ICC सेमिनार में चर्चा संभावित है।
दुबई में होने वाली इस बैठक में 12 पूर्ण सदस्य टेस्ट टीमों के साथ आठ एसोसिएट सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। बैठक का प्रमुख एजेंडा भविष्य के क्रिकेट कार्यक्रम यानी Future Tours Programme (FTP) और 2027 से 2031 तक के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट चक्र की रूपरेखा तैयार करना है। इसी दौरान बहुराष्ट्रीय क्रिकेट आयोजनों के नए मॉडल पर भी विचार हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, ICC पारंपरिक द्विपक्षीय सीरीज के अलावा तीन या चार टीमों वाली प्रतियोगिताओं को एक विकल्प के तौर पर देख रही है। इसके पीछे व्यावसायिक पहलू भी अहम है। छोटे बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत-पाकिस्तान जैसे हाई-प्रोफाइल मुकाबले शामिल होने से दर्शकों की दिलचस्पी और प्रसारण अधिकारों से होने वाली कमाई बढ़ने की संभावना रहती है।
भारत और पाकिस्तान के बीच आखिरी द्विपक्षीय सीरीज 2012-13 में खेली गई थी, जब पाकिस्तान की टीम ने भारत का दौरा किया था। इसके बाद दोनों देशों की क्रिकेट टीमें द्विपक्षीय मुकाबलों में आमने-सामने नहीं आईं। दोनों के बीच मुकाबले मुख्य रूप से ICC और एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के आयोजनों तक सीमित रहे हैं।

प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो दोनों देशों के बीच पूरी द्विपक्षीय क्रिकेट बहाल किए बिना भी मुकाबलों का सिलसिला बढ़ाया जा सकता है। तीन या चार देशों की प्रतियोगिता में भारत और पाकिस्तान को एक साथ शामिल करने से दोनों टीमों को नियमित रूप से भिड़ने का अवसर मिल सकता है।
ऐसी किसी प्रतियोगिता के आयोजन के लिए तटस्थ मैदान का विकल्प सबसे अहम होगा। संभावित मेजबानों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के नाम देखे जा रहे हैं। हालांकि, मेजबानी को लेकर अंतिम फैसला प्रस्ताव के आगे बढ़ने के बाद ही संभव होगा।
फिलहाल यह पहल शुरुआती विचार-विमर्श के स्तर पर है और इसे लागू करने के लिए सदस्य देशों के क्रिकेट बोर्डों की सहमति जरूरी होगी। अगर सितंबर में दुबई में होने वाली बैठक में प्रस्ताव को पर्याप्त समर्थन मिलता है, तो आने वाले वर्षों में भारत-पाकिस्तान मुकाबलों की संख्या बढ़ाने का एक नया रास्ता खुल सकता है।