Thursday, October 8, 2026
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झारखंड में नियमित DGP की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 7 सितंबर को होगी सुनवाई

by उर्वशी शेखर
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झारखंड में नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई अब अहम पड़ाव पर पहुंच गई है। प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में बुधवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने झारखंड समेत विभिन्न राज्यों में DGP की नियुक्ति से जुड़े मामलों पर प्रारंभिक सुनवाई की।

बुधवार को मामले पर आंशिक सुनवाई हुई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को सुनने के लिए 7 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। अगली सुनवाई में अदालत इस मुद्दे पर विस्तार से दलीलें सुनेगी।

न्याय मित्र से मांगी गई थी विस्तृत रिपोर्ट

इससे पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मामले से संबंधित पूरा पेपरबुक न्याय मित्र (Amicus Curiae) को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। अदालत ने न्याय मित्र से सभी दस्तावेजों और संबंधित पहलुओं का अध्ययन कर एक विस्तृत नोट प्रस्तुत करने को कहा था।

शीर्ष अदालत के सामने देश के अलग-अलग राज्यों में DGP की नियुक्ति से संबंधित कई अर्जियां लंबित हैं। इनमें यह भी आरोप लगाए गए हैं कि कुछ राज्यों में पुलिस प्रमुख की नियुक्ति करते समय सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसले में निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। इसी व्यापक मामले की सुनवाई के दौरान झारखंड में नियमित DGP की नियुक्ति का मुद्दा भी अदालत के समक्ष आया है।

2006 के फैसले में तय हुई थी नियुक्ति की प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2006 में प्रकाश सिंह मामले में पुलिस सुधारों को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे। DGP की नियुक्ति को लेकर अदालत ने व्यवस्था दी थी कि राज्यों को केवल कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक की व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

निर्देशों के मुताबिक UPSC द्वारा तैयार किए गए तीन वरिष्ठतम योग्य अधिकारियों के पैनल में से राज्य को नियमित DGP का चयन करना होगा। नियुक्ति के बाद संबंधित अधिकारी को कम से कम दो वर्ष का कार्यकाल दिया जाना चाहिए।

झारखंड में नियमित DGP की नियुक्ति और कार्यवाहक व्यवस्था को लेकर पहले भी सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं। अब 7 सितंबर को होने वाली विस्तृत सुनवाई में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि राज्य में DGP की नियुक्ति को लेकर मौजूदा व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं।

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