Tuesday, October 6, 2026
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नेपाल त्रासदी में अपनों की पहचान पहचान की कवायद, झारखंड में शुरू होगी DNA प्रोफाइलिंग

by उर्वशी शेखर
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नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं और हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इस संकट के बीच नेपाल में बरामद हो रहे अज्ञात शवों की पहचान के लिए भारत सरकार ने डीएनए प्रोफाइलिंग की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य लापता भारतीय नागरिकों के परिवारों से प्राप्त जैविक नमूनों का मिलान कर शवों की पहचान सुनिश्चित करना है।

इस अभियान के तहत देश के विभिन्न राज्यों में लापता लोगों के परिजनों के डीएनए सैंपल लिए जाएंगे। झारखंड में इसके लिए रांची के होटवार स्थित डायरेक्टरेट ऑफ फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी को प्रमुख केंद्र बनाया गया है। यहां परिजनों से नमूने लेने के साथ उनकी फॉरेंसिक जांच और डीएनए प्रोफाइल तैयार करने की व्यवस्था की गई है।

पूरी प्रक्रिया के समन्वय की जिम्मेदारी फॉरेंसिक लैब के असिस्टेंट डायरेक्टर ज्वाला कुमार को दी गई है। उन्हें झारखंड के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है। राज्य और आसपास के इलाकों से आने वाले लापता व्यक्तियों के परिजनों के नमूने निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए जाएंगे और इन्हें नेपाल में मिले अज्ञात शवों के डीएनए से मिलान के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

किन रिश्तेदारों के सैंपल लिए जाएंगे?

विदेश मंत्रालय के निर्देश के मुताबिक डीएनए जांच के लिए केवल लापता व्यक्ति के प्रथम-श्रेणी के जैविक रिश्तेदार ही सैंपल दे सकते हैं। इसमें माता-पिता, बेटा-बेटी तथा सगे भाई-बहन शामिल हैं। इन रिश्तेदारों से प्राप्त नमूनों के आधार पर तैयार डीएनए प्रोफाइल को अज्ञात शवों से हासिल प्रोफाइल से मिलाया जाएगा।

इस वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए उन परिवारों को अपने लापता परिजनों के बारे में पुख्ता जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, जो आपदा के बाद से उनकी तलाश में हैं।

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