Tuesday, October 6, 2026
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सीएफडी के राष्ट्रीय सम्मेलन में लोकतंत्र पर मंथन, प्रो. शशि शेखर बने राष्ट्रीय अध्यक्ष

by उर्वशी शेखर
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सिटीजन फॉर डेमोक्रेसी (सीएफडी) का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन रविवार शाम पुणे, महाराष्ट्र में संपन्न हुआ। देश के अलग-अलग हिस्सों से जुटे अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रबुद्ध नागरिकों और युवा प्रतिनिधियों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था, नागरिक अधिकारों और कानून के शासन से जुड़े समकालीन मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

सम्मेलन का उद्घाटन प्रसिद्ध समाजवादी चिंतक प्रोफेसर आनंद कुमार ने किया। कार्यक्रम के दौरान रांची की सामाजिक कार्यकर्ता किरण ने देश में कानून के शासन की स्थिति और लोकतांत्रिक संस्थाओं के कमजोर होने को लेकर चिंता जताई। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए नागरिक समाज की सक्रिय भूमिका को जरूरी बताया।

अधिवेशन में प्रोफेसर शशि शेखर सिंह, हैदराबाद से आए समाजवादी चिंतक एवं सेवानिवृत्त न्यायाधीश टी. गोपाल सिंह सहित सामाजिक और लोकतांत्रिक सरोकारों से जुड़े कई प्रमुख लोगों ने विचार रखे।

प्रो. शशि शेखर को मिली राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी

सम्मेलन के दौरान सीएफडी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी गठन किया गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षक और गांधी, लोहिया तथा जयप्रकाश नारायण की विचारधारा से जुड़े लोकतांत्रिक कार्यकर्ता प्रो. शशि शेखर को सर्वसम्मति से संगठन का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। वहीं प्रसिद्ध समाजसेवी ज्योत्सना राय को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।

संगठन की नई टीम में तेजिंदर सिंह आहूजा, बसंती दिघे, दीपक ढोलकिया और रोहित चौहान को उपाध्यक्ष चुना गया। रणधीर गौतम, किरण, नूतन मालवी और राजेश रामकृष्ण को सचिव बनाया गया, जबकि उमाशंकर को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई।

राष्ट्रीय परिषद में 45 सदस्य

सीएफडी की नई राष्ट्रीय परिषद में कुल 45 सदस्यों को शामिल किया गया है। परिषद में पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मदन लोकुर, जस्टिस एपी शाह, गांधीवादी चिंतक तुषार गांधी, प्रोफेसर आनंद कुमार और जस्टिस टी. गोपाल सिंह को भी स्थान दिया गया है।

नई परिषद से संगठन के लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े अभियानों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई गई।

स्मरणिका का विमोचन, समापन भाषण के साथ अधिवेशन समाप्त

सम्मेलन के अंतिम दिन एक स्मरणिका का विमोचन भी किया गया। दो दिनों तक चले कार्यक्रम में लोकतंत्र, संवैधानिक मूल्यों, नागरिक अधिकारों और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

अंतिम सत्र में प्रोफेसर आनंद कुमार ने समापन संबोधन दिया। इसके साथ ही सीएफडी का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन औपचारिक रूप से संपन्न हो गया।

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