Tuesday, October 6, 2026
Home » सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक भाषा हिंदी करने की मांग वाली PIL खारिज, SC ने कहा- संवैधानिक संशोधन का विषय

सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक भाषा हिंदी करने की मांग वाली PIL खारिज, SC ने कहा- संवैधानिक संशोधन का विषय

by उर्वशी शेखर
0 comments

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस जनहित याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें शीर्ष अदालत की आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी को अपनाने की दिशा में सुझाव देने के लिए केंद्र सरकार को एक आयोग गठित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष आया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।

याचिकाकर्ता ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रा की ओर से पेश वकील ने अदालत से आग्रह किया कि केंद्र को एक विशेषज्ञ आयोग बनाने का निर्देश दिया जाए। आयोग को सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक भाषा के तौर पर हिंदी के इस्तेमाल की संभावनाओं का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें देने का प्रस्ताव था। याचिका में कुछ संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए राहत मांगी गई थी।

सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि भाषा से संबंधित बदलाव प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर क्रमिक रूप से किए जा रहे हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे सुधारों को न्यायिक आदेश के जरिए लागू करना उचित नहीं होगा।

पीठ ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से रिपोर्टों का हिंदी में संक्षिप्त विवरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। साथ ही अन्य भारतीय भाषाओं को भी धीरे-धीरे इस पहल में शामिल करने की बात कही गई। अदालत ने क्षेत्रीय भाषाओं के सम्मान और सांस्कृतिक विविधता बनाए रखने पर भी जोर दिया।

याचिकाकर्ता के वकील ने इसके बावजूद कम से कम एक आयोग गठित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया। इस पर पीठ ने कहा कि याचिका में मांगी गई व्यवस्था के लिए संवैधानिक स्तर पर बदलाव की आवश्यकता पड़ सकती है और अदालत इस तरह का संशोधन खुद नहीं कर सकती।

पीठ ने मौखिक टिप्पणी में सवाल उठाया कि यदि मांग संविधान में बदलाव से जुड़ी है, तो अदालत इस संबंध में आदेश कैसे पारित कर सकती है। इसके साथ ही अदालत ने संकेत दिया कि भाषा संबंधी सुधार किसी एक न्यायिक आदेश से नहीं, बल्कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ते हैं।

You may also like

Leave a Comment