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रांची में मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की विशेष अदालत ने PLFI सुप्रीमो दिनेश गोप से जुड़े करीब 20 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी है। विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में पलामू जेल में बंद दिनेश गोप को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया। सुनवाई के दौरान उसे पेन ड्राइव के माध्यम से पुलिस पेपर उपलब्ध कराया गया।
अदालत ने मामले में 7 अक्टूबर को दिनेश गोप, उसकी दोनों पत्नियों समेत डेढ़ दर्जन से अधिक आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया निर्धारित की है।
कई आरोपियों ने बॉन्ड की अवधि बढ़ाने की मांग की
सुनवाई के दौरान जितेंद्र कुमार, सुमंत कुमार, फैसल मूसा, विनय कुमार जालान, जनार्दन कुमार सोनी, नंद लाल सोनी, अमित कुमार उर्फ अमित जायसवाल, चंद्रशेखर कुमार, जय प्रकाश सिंह भुइयां, नंद किशोर महतो, फुलेश्वर गोप, हीरा देवी, शकुंतला कुमारी, अरुण गोप और बिनोद कुमार समेत अन्य आरोपियों ने BNSS की धारा 91 के तहत अपने बॉन्ड की अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन दिया।
आवेदन की प्रति ईडी के विशेष लोक अभियोजक को उपलब्ध कराई गई। सुनवाई के बाद अदालत ने इन अर्जियों को मंजूर करते हुए संबंधित आरोपियों के बॉन्ड की अवधि अगली सुनवाई तक बढ़ा दी।
फैसल मूसा ने मांगी माफी, नाम हटाने का किया अनुरोध
फैसल मूसा की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि आरोपी ने BNSS की धारा 343 के तहत माफी दिए जाने और आरोपियों की सूची से अपना नाम हटाने का अनुरोध करते हुए 31 जुलाई को आवेदन दाखिल किया था। अधिवक्ता के अनुसार, उस दिन की ऑर्डर शीट में इस आवेदन का उल्लेख नहीं हो पाया था।
अदालत ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया है कि निर्धारित अगली तारीख तक जितेंद्र कुमार और फैसल मूसा की अर्जियों पर अपना जवाब दाखिल करें।
लेवी की रकम को शेल कंपनियों में लगाने का आरोप
एनआईए और ईडी की जांच के अनुसार, विनोद कुमार, चंद्रशेखर कुमार, नंद किशोर महतो और मोहन कुमार को दिनेश गोप के करीबी सहयोगियों के तौर पर चिन्हित किया गया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन लोगों ने आपराधिक साजिश के तहत PLFI की लेवी और रंगदारी से जुटाई गई रकम को एकत्र करने में मदद की।

जांच में यह भी आरोप सामने आया कि सुमंत कुमार, नंदलाल स्वर्णकार, चंद्रशेखर सिंह, अरुण गोप, जितेंद्र कुमार, नवीन भाई, जयंती भाई पटेल और दिनेश गोप ने मिलकर कथित तौर पर लेवी से हासिल धन को विभिन्न शेल कंपनियों के जरिए खपाया। एजेंसियों के मुताबिक, यह रकम ठेकेदारों, कारोबारियों और विकास परियोजनाओं से लेवी के तौर पर वसूली गई थी।
परिवार से जुड़ी कंपनियों और बैंक खातों की जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित लेवी की रकम जिन कंपनियों में लगाई गई, उनमें मेसर्स शिव आदि शक्ति, मेसर्स शिव शक्ति समृद्धि इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स भव्य इंजीकॉन जैसी कंपनियां शामिल हैं। जांच में इन कंपनियों के दिनेश गोप के परिवार के सदस्यों के साथ कारोबारी संबंध होने की बात सामने आई है।
एजेंसियों ने हवाला के जरिए रकम को अलग-अलग स्थानों पर भेजे जाने का भी दावा किया है। जांच के दौरान दो दर्जन से अधिक बैंक खातों में करोड़ों रुपये के लेन-देन का पता चलने की बात कही गई है। इनमें कुछ खाते कथित शेल कंपनियों के हैं, जबकि कुछ दिनेश गोप के परिवार से जुड़े लोगों के नाम पर संचालित होने की जानकारी जांच में सामने आई है।
अब 7 अक्टूबर की सुनवाई पर सभी की नजर है, जब अदालत इस मामले में दिनेश गोप, उसकी दोनों पत्नियों और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।