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उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद मंच के कथित शुद्धिकरण का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक चर्चा का विषय बन रहा है। कांग्रेस ने इस घटना को दलित और आदिवासी समुदाय के सम्मान से जोड़ते हुए व्यापक स्तर पर उठाने की तैयारी की है। इसी सिलसिले में पार्टी के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति सांसदों का फोरम मंगलवार, 29 सितंबर को दिल्ली में ‘दलित-आदिवासी स्वाभिमान’ बैठक आयोजित करेगा। इसमें हल्द्वानी की घटना के साथ देशभर में दलितों और आदिवासियों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों पर चर्चा की जाएगी।
कांग्रेस का कहना है कि हल्द्वानी में हुई कथित घटना को केवल पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के व्यक्तिगत अपमान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। पार्टी इसे दलित और आदिवासी समुदायों की गरिमा से जुड़ा विषय मान रही है।
कांग्रेस सांसदों ने आरोप लगाया है कि इस मामले में अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से कोई निंदा नहीं की गई है। पार्टी के अनुसार, इस तरह की घटनाएं समाज में मौजूद जातिगत भेदभाव की समस्या को सामने लाती हैं।

दिल्ली में जुटेंगे कांग्रेस के सांसद, पूर्व मंत्री और विधायक
दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में प्रस्तावित बैठक में कांग्रेस के वर्तमान एससी-एसटी सांसदों के साथ पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य दलितों और आदिवासियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर पार्टी की आगामी कार्ययोजना निर्धारित करना है।
हल्द्वानी की घटना के अलावा विभिन्न राज्यों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों के मामलों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना भी बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल है।
SC-ST कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग
कांग्रेस सांसदों ने जातिगत भेदभाव और अत्याचार से संबंधित मौजूदा कानूनों के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 को प्रभावी तरीके से लागू करने की आवश्यकता बताई है।

प्रस्तावित बैठक में इन कानूनों के अमल से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके साथ ही दलित और आदिवासी समुदायों के खिलाफ होने वाली घटनाओं पर राजनीतिक एवं संगठनात्मक स्तर पर प्रतिक्रिया देने की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी।
हर राज्य में संयुक्त कार्रवाई की तैयारी
कांग्रेस की इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राज्यों के बीच संगठनात्मक समन्वय स्थापित करना है। पार्टी सांसदों के अनुसार, प्रत्येक प्रदेश में संयुक्त कार्रवाई पैनल के माध्यम से दलितों और आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार के मामलों को उठाने का प्रस्ताव है।
इन पैनलों के जरिए अलग-अलग राज्यों में होने वाली घटनाओं पर समन्वित कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रभावित लोगों को राजनीतिक और संगठनात्मक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
कांग्रेस की योजना हल्द्वानी की घटना से शुरू हुई इस राजनीतिक पहल को राष्ट्रीय स्तर पर दलित और आदिवासी अधिकारों से जुड़े व्यापक अभियान का रूप देने की है। मंगलवार की बैठक में इस अभियान की आगे की दिशा और राज्यों में संयुक्त कार्रवाई की रूपरेखा पर चर्चा होगी।
हैदराबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट