बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार दोपहर 2:15 बजे सुनवाई निर्धारित है। सोरेन ने ईडी की विशेष पीएमएलए अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें जांच पूरी होने तक उनके खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया रोकने की मांग स्वीकार नहीं की गई थी।
हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में हेमंत सोरेन ने मामले की सुनवाई पीएमएलए की धारा 44(1)(डी) के तहत किए जाने का आग्रह किया है। साथ ही उन्होंने इसी प्रावधान की संवैधानिक वैधता पर भी सवाल उठाते हुए उसे चुनौती दी है।
जांच पूरी होने तक आरोप तय नहीं करने की दलील
याचिका के केंद्र में आरोप गठन की प्रक्रिया को लेकर उठाया गया सवाल है। हेमंत सोरेन का पक्ष है कि जब संबंधित मामले में जांच अभी पूरी नहीं हुई है, तब तक आरोप तय करने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़नी चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने ईडी की विशेष अदालत के समक्ष भी आवेदन दिया था।

विशेष पीएमएलए अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद अब इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट के फैसले से यह तय होने में मदद मिलेगी कि मामले में आरोप गठन की प्रक्रिया को लेकर आगे किस तरह की कानूनी कार्रवाई होगी।
बुधवार को इस मामले में दो स्तरों पर कानूनी कार्यवाही होने वाली है। जहां हाईकोर्ट में हेमंत सोरेन की याचिका पर सुनवाई होगी, वहीं ईडी की विशेष पीएमएलए अदालत में भी बड़गाईं जमीन मामले से जुड़ी कार्यवाही जारी रहेगी। विशेष अदालत में सोरेन के खिलाफ आरोप गठन का मुद्दा लंबित है।
17 आरोपितों में 16 के खिलाफ आरोप तय
बड़गाईं जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और उससे संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कुल 17 लोग आरोपित हैं। इनमें 16 आरोपितों के खिलाफ आरोप पहले ही तय किए जा चुके हैं। शनिवार को राज कुमार पाहन के खिलाफ भी विशेष पीएमएलए अदालत ने आरोप गठित किया।
इससे पहले पूर्व आईएएस अधिकारी छवि रंजन सहित 15 अन्य आरोपितों के खिलाफ आरोप तय हो चुके थे। अब मामले में हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया बाकी है।
ऐसे में हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई को मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।