झारखंड और डीवीसी के कमांड क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने दामोदर वैली कॉरपोरेशन (DVC) और एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम लिमिटेड (NVVN) के बीच हुए बिजली खरीद समझौते को मंजूरी दे दी है। इसके बाद डीवीसी के लिए भूटान की जलविद्युत परियोजना से 137.5 मेगावाट बिजली हासिल करने का रास्ता साफ हो गया है।इस समझौते के तहत डीवीसी भूटान की पुनातसंगछू-द्वितीय (Punatsangchhu-II) हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना से बिजली खरीदेगा। यह परियोजना वांगड्यू फोड्रंग जिले में पुनातसंगछू नदी पर विकसित की गई है। इसकी कुल उत्पादन क्षमता 1,020 मेगावाट है, जिसे 170-170 मेगावाट की छह इकाइयों में बांटा गया है।
भारत-भूटान की संयुक्त परियोजना से मिलेगा हिस्सा
पुनातसंगछू-द्वितीय एक रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत परियोजना है, जिसे भारत और भूटान के बीच सहयोग के तहत विकसित किया गया है। परियोजना की सभी इकाइयों का कमीशनिंग कार्य अगस्त 2025 में पूरा हो चुका है।केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा तय आवंटन व्यवस्था के तहत परियोजना की कुल क्षमता का 13.48 प्रतिशत हिस्सा डीवीसी के लिए निर्धारित किया गया है। इसके मुताबिक डीवीसी को अधिकतम 137.5 मेगावाट फर्म पावर मिलेगी।
डीवीसी और एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम के बीच यह बिजली खरीद समझौता 12 मई 2026 को हुआ था। करार की अवधि 40 वर्ष रखी गई है। हालांकि, यदि परियोजना की शेष उपयोगी अवधि इससे कम रहती है, तो समझौता प्लांट की शेष उम्र तक ही प्रभावी रहेगा।

RPO और हाइड्रो पावर लक्ष्य पूरा करने में मदद
डीवीसी के लिए इस समझौते का महत्व केवल अतिरिक्त बिजली हासिल करने तक सीमित नहीं है। जलविद्युत की खरीद से निगम को अपने उपभोक्ता क्षेत्रों में बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के साथ-साथ वैधानिक Renewable Purchase Obligation (RPO) और Hydro Power Obligation (HPO) को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के अक्टूबर 2023 के प्रावधानों के अनुसार, 31 मार्च 2024 के बाद शुरू होने वाली पात्र जलविद्युत परियोजनाओं से प्राप्त बिजली को हाइड्रो रिन्यूएबल एनर्जी कंप्लायंस में शामिल किया जा सकता है। इस व्यवस्था के दायरे में भारत के बाहर स्थित पात्र परियोजनाएं भी आती हैं।
पीक डिमांड में बढ़ेगी बिजली व्यवस्था की मजबूती
भूटान से मिलने वाली जलविद्युत डीवीसी के बिजली पोर्टफोलियो को अधिक संतुलित बनाने में मदद कर सकती है। खासकर मानसून के दौरान और अधिकतम मांग वाले घंटों में यह बिजली सिस्टम की जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी होगी।
आयोग ने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 86(1)(बी) और 86(1)(ई) के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए पावर परचेस एग्रीमेंट को मंजूरी दी है।
DVC पहले से ही सौर और हाइब्रिड अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश और भागीदारी कर रहा है। ऐसे में भूटान से मिलने वाली अतिरिक्त जलविद्युत उसके स्वच्छ ऊर्जा पोर्टफोलियो को और मजबूत करेगी। साथ ही, कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता को संतुलित करने और उत्सर्जन घटाने की दिशा में भी यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है।