Thursday, October 8, 2026
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रांची में 100 एकड़ में बनेगा हाईटेक IT पार्क, AI और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी निवेश की तैयारी

by उर्वशी शेखर
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झारखंड की राजधानी रांची को देश के प्रमुख तकनीकी और औद्योगिक निवेश केंद्रों में शामिल करने की दिशा में राज्य सरकार ने नई पहल की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और RMZ Infrastructure के प्रेसिडेंट दीपक छाबड़िया के बीच हुई बैठक में राजधानी में विशाल आईटी पार्क विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के कांके रोड स्थित सरकारी आवास पर हुई इस मुलाकात में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) की स्थापना सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया।

प्रस्तावित परियोजना के तहत वर्ष 2029 तक रांची में आधुनिक सुविधाओं से लैस आईटी पार्क शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। शुरुआती चरण में यहां करीब 20 हजार तकनीकी पेशेवरों के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने की योजना है। इसके बाद अगले तीन वर्षों के दौरान परियोजना का विस्तार कर कुल 75 हजार उच्च कौशल वाले रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस परियोजना के माध्यम से राज्य सरकार झारखंड के इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते खोलना चाहती है। सरकार को उम्मीद है कि बड़ी तकनीकी कंपनियों के राज्य में आने से युवाओं को नौकरी के लिए दूसरे महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

विधानसभा और हाईकोर्ट के पास 100 एकड़ जमीन पर विकसित होगा IT हब

रांची में प्रस्तावित आईटी पार्क के लिए लगभग 100 एकड़ भूमि की पहचान की गई है। यह जमीन आईआईएम रांची, झारखंड विधानसभा के नए भवन और झारखंड उच्च न्यायालय के आसपास स्थित है। हालांकि, परियोजना के लिए इस स्थल को अभी संभावित विकल्प के रूप में चिह्नित किया गया है।

योजना के अनुसार, इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्यालय परिसर, उन्नत संचार नेटवर्क और तकनीकी कंपनियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा। यहां देश-विदेश की बड़ी कंपनियों को कारोबार स्थापित करने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।

AI से लेकर सेमीकंडक्टर तक, कई क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने की तैयारी

मुख्यमंत्री और RMZ Infrastructure के प्रतिनिधि के बीच हुई बातचीत केवल आईटी पार्क के निर्माण तक सीमित नहीं रही। बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर डिजाइन, आधुनिक विनिर्माण, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निजी निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

इसके अलावा रांची में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने की योजना पर विशेष ध्यान दिया गया। इन केंद्रों के माध्यम से बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अपने डेटा विश्लेषण, अनुसंधान, तकनीकी विकास और अन्य महत्वपूर्ण व्यावसायिक कार्यों का संचालन झारखंड से कर सकेंगी।

इस पहल का उद्देश्य राज्य में तकनीकी उद्योगों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना है, जिससे नए निवेश के साथ-साथ विशेषज्ञता आधारित रोजगार के अवसर भी बढ़ सकें।

बेंगलुरु जाएगा झारखंड का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल

रांची में प्रस्तावित आईटी पार्क की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने से पहले राज्य सरकार देश के स्थापित तकनीकी केंद्रों के अनुभवों का अध्ययन करेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल अक्टूबर में बेंगलुरु का दौरा करेगा।

इस दौरान अधिकारी वहां संचालित प्रमुख आईटी पार्कों, तकनीकी कंपनियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और निवेश आकर्षित करने वाली नीतियों की जानकारी जुटाएंगे। विशेष रूप से एकल खिड़की प्रणाली के माध्यम से निवेशकों को मिलने वाली सुविधाओं और तकनीकी उद्योगों के विकास के लिए अपनाए गए मॉडल का अध्ययन किया जाएगा।

प्रतिनिधिमंडल की अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर रांची में प्रस्तावित आईटी पार्क का अंतिम मास्टर प्लान तैयार करने की योजना है।

झारखंड के युवाओं को राज्य में ही रोजगार देने पर जोर

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैठक के दौरान झारखंड में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और युवा मानव संसाधन का बेहतर उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक तकनीक के माध्यम से झारखंड के विकास की नई संभावनाएं तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, युवाओं को आधुनिक उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रस्तावित आईटी पार्क और तकनीकी निवेश से राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ औद्योगिक विकास को भी गति देने की योजना है।

यदि प्रस्तावित परियोजना निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ती है, तो रांची में बड़े तकनीकी निवेश का रास्ता खुल सकता है। इसके साथ ही झारखंड में उच्च कौशल आधारित रोजगार और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की मौजूदगी बढ़ने की संभावना है।

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