बिहार में शराबबंदी को लेकर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकार का रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस नीति के लागू होने के बाद राज्य को लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के राजस्व की क्षति हुई है, लेकिन आर्थिक नुकसान के बावजूद शराबबंदी खत्म करने का कोई विचार नहीं है।
सम्राट चौधरी के मुताबिक, शराबबंदी को सिर्फ सरकारी आमदनी के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। सरकार के लिए यह महिलाओं के सम्मान, घरेलू सुरक्षा और परिवारों के हित से जुड़ा सामाजिक फैसला है। यही वजह है कि राजस्व में कमी के बावजूद सरकार इस नीति को जारी रखने के अपने निर्णय से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है।

उपमुख्यमंत्री ने शराबबंदी के बाद समाज में आए बदलावों का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि इस फैसले का विशेष असर महिलाओं और परिवारों के जीवन पर देखने को मिला है। सरकार का मानना है कि शराब के कारण पैदा होने वाली सामाजिक परेशानियों को नियंत्रित करने में शराबबंदी की अहम भूमिका है।
उन्होंने संकेत दिया कि शराब से होने वाले राजस्व की कमी की भरपाई के लिए सरकार अन्य आर्थिक स्रोतों पर ध्यान देगी। हालांकि, राजस्व बढ़ाने के लिए शराबबंदी में बदलाव या इसे समाप्त करने का विकल्प सरकार के सामने नहीं है।