Thursday, October 8, 2026
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कानपुर हत्याकांड में बड़ा खुलासा! बहू शालू नहीं, बेटा सुब्रत निकला कातिल

by उर्वशी शेखर
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कानपुर के कल्याणपुर स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या के मामले में जांच ने बड़ा मोड़ ले लिया है। पुलिस ने जिस बहू शालू को पहले हत्या की साजिश में आरोपी बनाकर जेल भेजा था, अब जांच में उसे निर्दोष माना है। पुलिस ने मामले में उसके खिलाफ अंतिम रिपोर्ट लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण शालू की रिहाई फिलहाल टल गई है।

शुक्रवार को अंतिम रिपोर्ट पर अदालत में सुनवाई नहीं हो सकी। बताया गया कि विवेचक के देर से न्यायालय पहुंचने के कारण आवश्यक कार्रवाई पूरी नहीं हो पाई। सितंबर के अंतिम शनिवार और रविवार को अदालत बंद रहने के चलते अब मामले में सुनवाई सोमवार को होने की संभावना है। ऐसे में शालू को फिलहाल दो दिन और जेल में रहना पड़ेगा।

17 चाकू के वार से हुई थी कारोबारी की हत्या

मामला 5 सितंबर का है। कल्याणपुर के इंदिरा नगर स्थित रतन ऑर्बिट के फ्लैट सी-104 में विनीत मिनोचा का शव मिला था। उनके शरीर और गर्दन पर चाकू से किए गए 17 गंभीर वार के निशान मिले थे।

शुरुआती जांच में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम और उसके एक साथी को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान विशाल ने कथित तौर पर शालू का नाम लिया और दावा किया कि हत्या उसके कहने पर की गई थी। इसी बयान के आधार पर पुलिस ने शालू को भी आरोपी बनाकर जेल भेज दिया था।

उस समय पुलिस के सामने कई ऐसे तथ्य थे, जिन्हें शालू के खिलाफ अहम माना गया। इनमें विशाल द्वारा उसका नाम लेना, सुरक्षा गार्ड को गलत नाम बताकर विशाल को अपार्टमेंट में प्रवेश दिलाने की बात, घर के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग बंद होना और कथित तौर पर 6 लाख रुपये की सुपारी दिए जाने का आरोप शामिल था।

18 दिन की जांच में बदली पूरी कहानी

करीब 18 दिनों तक चली जांच के बाद पुलिस को इन आरोपों की दिशा अलग नजर आने लगी। जांच में पुलिस का दावा है कि हत्या की साजिश में शालू की भूमिका नहीं थी, बल्कि कारोबारी के बेटे सुब्रत ने कथित तौर पर पूरी वारदात को अंजाम दिया और संदेह अपनी पत्नी की ओर मोड़ने की कोशिश की।

गुरुवार को पुलिस ने सुब्रत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसी के साथ शालू को मामले में निर्दोष मानते हुए उसके खिलाफ अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने की बात कही गई।

शालू के परिजन शुक्रवार को अदालत में उसकी रिहाई की उम्मीद लेकर पहुंचे थे। हालांकि, पुलिस की ओर से अंतिम रिपोर्ट समय पर पेश नहीं किए जाने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। परिवार का कहना है कि यदि रिपोर्ट समय पर दाखिल होती तो शालू की रिहाई शनिवार को ही संभव हो सकती थी।

सुब्रत पर लाखों रुपये का कर्ज, सट्टे और जुए की भी बात सामने आई

पुलिस की जांच में सुब्रत की आर्थिक स्थिति और खर्च करने की आदतों से जुड़ी कई बातें भी सामने आई हैं। पुलिस के मुताबिक, महंगी जीवनशैली, शराब, कसीनो और सट्टेबाजी के चलते उस पर भारी कर्ज चढ़ गया था।

कानपुर पुलिस आयुक्त के अनुसार, सुब्रत ने गोवा के कसीनो और आईपीएल सट्टेबाजी में करीब 20 लाख रुपये गंवाए थे। इसके अलावा उसने अलग-अलग लोगों और संस्थानों से रकम उधार ली थी। पुलिस के मुताबिक, उसने दोस्त हर्षित से 9.50 लाख रुपये, एक ऐप से 3 लाख रुपये, अलग-अलग बैंकों से छोटी-बड़ी रकम और अपने ससुर नरेश अरोड़ा से करीब 14 लाख रुपये लिए थे।

कर्ज बढ़ने के बाद लेनदारों का दबाव भी बढ़ता गया। पुलिस के अनुसार, 16 जून की रात सुब्रत ने अपने पिता को बताया था कि वह करीब 35 से 40 लाख रुपये के कर्ज में है और लगातार परेशान किया जा रहा है। उसने लेनदारों से बचने के लिए मोबाइल बंद रखने की बात भी कही थी।

पिता से आर्थिक मदद नहीं मिलने का आरोप

जांच में यह भी सामने आया कि सुब्रत ने अपने पिता से आर्थिक मदद मांगी थी, लेकिन विनीत मिनोचा ने कथित तौर पर उसके कर्ज की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस घटना के बाद सुब्रत ने शराब पी और बाद में नशे की हालत में कार चलाते हुए दुर्घटना कर दी। उस समय उसकी पत्नी शालू लखनऊ स्थित मायके में थी और दुर्घटना की जानकारी मिलने के बाद अगले दिन कानपुर पहुंची थी।

पुलिस के सामने पूछताछ के दौरान सुब्रत ने अपने पिता के साथ रिश्तों को लेकर भी कई आरोप लगाए। उसका दावा था कि पिता अपनी निजी जिंदगी पर काफी खर्च करते थे, जबकि उसे सीमित पैसे देते थे और खर्च किए गए पैसे का हिसाब मांगते थे।

करोड़ों के कारोबार के बावजूद पिता-पुत्र के बीच तनाव

पुलिस के अनुसार, विनीत मिनोचा की दवा की फर्म का सालाना कारोबार करीब 50 से 60 करोड़ रुपये था और कानपुर के प्रमुख दवा कारोबारियों में उसकी गिनती होती थी। इसके बावजूद सुब्रत का कहना था कि उसे कारोबार में अपेक्षित आर्थिक स्वतंत्रता नहीं मिलती थी।

पूछताछ में उसने यह भी आरोप लगाया कि पिता कर्मचारियों के सामने उसे डांटते थे और कारोबारी फैसलों में उसे बराबरी का स्थान नहीं मिलता था। पुलिस अब इन्हीं पारिवारिक तनावों, आर्थिक दबाव और कर्ज को हत्या के पीछे की कथित वजहों के रूप में जांच रही है।

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