Thursday, October 8, 2026
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24 अभ्यर्थी, ₹1.20 करोड़ और ‘सेटिंग’ का दावा… JPSC मामले की CID जांच में नए तथ्य

by उर्वशी शेखर
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झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित गड़बड़ी और ‘सेटिंग’ के मामले की जांच में सीआईडी ने सौरभ कुमार उर्फ सौरभ पांडेय की भूमिका को लेकर कई अहम जानकारी सामने आने का दावा किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, सौरभ मुख्य आरोपी अभय कुमार तिवारी का रिश्तेदार है और कथित तौर पर अभ्यर्थियों तथा परीक्षा से जुड़े नेटवर्क के बीच संपर्क सूत्र के रूप में काम करता था।

सीआईडी के अनुसार, अप्रैल 2026 में प्रस्तावित परीक्षा में चयन कराने का भरोसा देकर 24 से अधिक अभ्यर्थियों से संपर्क किया गया था। इनमें 11 अभ्यर्थियों से कथित तौर पर करीब 1.20 करोड़ रुपये लिए गए। जांच एजेंसी अब इस रकम के लेन-देन और पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।

किराये के मकान में चल रहा था कथित नेटवर्क

जांच में एक ऐसे मकान का भी उल्लेख सामने आया है, जिसे कथित सिंडिकेट ने अपनी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया। सीआईडी के मुताबिक, यह मकान करीब 50 हजार रुपये मासिक किराये पर लिया गया था और यहीं से अभ्यर्थियों से संपर्क तथा कथित लेन-देन से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जाती थीं।

आरोप है कि चयन का भरोसा देकर अभ्यर्थियों से रकम लेने के साथ उनके ब्लैंक चेक, सादे स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर और मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र भी लिए जाते थे। जांच एजेंसी इन दस्तावेजों को कथित नेटवर्क के काम करने के तरीके का अहम हिस्सा मान रही है।

प्रमाणपत्र वापस कराने में भी सौरभ की भूमिका का दावा

सीआईडी की जांच के अनुसार, सौरभ कथित तौर पर सिर्फ अभ्यर्थियों को नेटवर्क से जोड़ने और उनसे पैसे या दस्तावेज हासिल करने तक सीमित नहीं था। जब कुछ अभ्यर्थियों को कथित तौर पर ठगी का संदेह हुआ और उन्होंने अपने मूल प्रमाणपत्र वापस मांगे, तब सौरभ ने उमेश कुमार के माध्यम से उनके दस्तावेज वापस कराने की व्यवस्था की।

जांच एजेंसी का कहना है कि अब तक सामने आए तथ्यों से कथित परीक्षा सेटिंग नेटवर्क में सौरभ की भूमिका और अभ्यर्थियों को अपने प्रभाव में लेने के तरीके के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। हालांकि, ये सभी आरोप जांच का हिस्सा हैं और इनकी अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

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