झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा से जुड़े विवाद की जांच कर रही CID की विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी पड़ताल का दायरा और बढ़ा दिया है। इसी क्रम में SIT ने आयोग के अधिवक्ता संजोय पिपरवाल को समन भेजकर पूछताछ के लिए उपस्थित होने को कहा है। जांच टीम परीक्षा से जुड़े कानूनी मामलों और आयोग की ओर से अदालत में अपनाए गए रुख के संबंध में जानकारी जुटाना चाहती है।
CGL परीक्षा को लेकर सामने आए कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद CID इस पूरे मामले की विभिन्न स्तरों पर जांच कर रही है। SIT की पड़ताल केवल परीक्षा संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि विवाद सामने आने के बाद आयोग ने किस तरह के प्रशासनिक और कानूनी निर्णय लिए और उन निर्णयों के पीछे क्या प्रक्रिया रही।
अदालती दस्तावेजों और कानूनी दलीलों पर फोकस
पूछताछ के दौरान अधिवक्ता संजोय पिपरवाल से परीक्षा से संबंधित न्यायिक मामलों में आयोग की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों, दलीलों और कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी लिए जाने की संभावना है। SIT यह समझने का प्रयास कर रही है कि अलग-अलग चरणों में आयोग के निर्णय किस आधार पर लिए गए और संबंधित कानूनी कार्रवाई कब तथा किस परिस्थिति में शुरू हुई।

जांच टीम परीक्षा कराने वाली एजेंसी, JSSC के अधिकारियों और कानूनी पक्ष से जुड़े लोगों के बीच हुए पत्राचार तथा निर्णयों की टाइमलाइन का भी मिलान कर रही है। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया के दौरान लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों और बाद में सामने आए विवादों के बीच किसी संभावित कड़ी की पहचान करना है।
कई लोगों से पहले ही हो चुकी है पूछताछ
इस मामले में SIT अब तक JSSC से जुड़े कई अधिकारियों के अलावा परीक्षा संचालन में भूमिका निभाने वाली बाहरी एजेंसियों के प्रतिनिधियों और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ कर चुकी है। जांच आगे बढ़ने के साथ SIT परीक्षा से जुड़े प्रशासनिक, तकनीकी और कानूनी पहलुओं को अलग-अलग स्तर पर खंगाल रही है।
अधिवक्ता संजोय पिपरवाल को भेजा गया समन इसी जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। उनसे मुख्य रूप से उन कानूनी प्रक्रियाओं और दस्तावेजों को लेकर जानकारी हासिल की जाएगी, जो JSSC-CGL विवाद के दौरान आयोग की कार्रवाई से जुड़े रहे हैं।