Wednesday, October 7, 2026
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JPSC-JSSC भर्ती घोटाले की जांच में नया खुलासा, CID के रडार पर पूर्व मुख्य सचिव कार्यालय का संविदाकर्मी

by उर्वशी शेखर
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झारखंड में JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे परीक्षा तंत्र के भीतर प्रभाव और कथित लेन-देन से जुड़े नए तथ्य सामने आ रहे हैं। CID की जांच में धर्मेंद्र कुमार नामक एक संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका को लेकर गंभीर जानकारी सामने आने की बात कही गई है। धर्मेंद्र मुख्य सचिव कार्यालय की गोपनीय शाखा में काम कर चुका है और इसी दौरान उसके प्रशासनिक संपर्क मजबूत होने का दावा जांच में किया गया है।

जांच से जुड़ी जानकारी के मुताबिक धर्मेंद्र के पिता पूर्व मुख्य सचिव पीपी शर्मा के आवास पर रसोइये के रूप में कार्यरत थे। पीपी शर्मा के कार्यकाल में ही धर्मेंद्र को मुख्य सचिव कार्यालय की गोपनीय शाखा में संविदा आधार पर कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में नियुक्त किया गया था। बाद में एल खियांग्ते के मुख्य सचिव रहने के दौरान भी वह गोपनीय शाखा से जुड़ा रहा। जांच एजेंसियों के अनुसार इसी अवधि में उसने सचिवालय के भीतर अपने संपर्कों का दायरा बढ़ाया।

धर्मेंद्र पर यह भी आरोप है कि वह अपने प्रभावशाली परिचितों का हवाला देकर प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाता था और यहां तक कि जिलाधिकारियों से भी अपने काम कराने का दावा करता था।

परीक्षा एजेंसी से कमीशन मांगने का आरोप

CID की पड़ताल में TDPL नामक परीक्षा संचालन एजेंसी के साथ धर्मेंद्र के कथित लेन-देन की बात सामने आई है। जांच के अनुसार, परीक्षा से संबंधित अलग-अलग काम TDPL को दिलाने के बदले उसने कथित तौर पर 25 लाख रुपये तक कमीशन की मांग की थी। इनमें OMR शीट की स्कैनिंग, एडमिट कार्ड तैयार करना और प्रश्नपत्रों की छपाई जैसे कार्य शामिल थे।

जांच एजेंसी के अनुसार धर्मेंद्र अभ्यर्थियों से भी पैसे लेकर उन्हें परीक्षा में सफलता दिलाने का भरोसा देता था। TDPL के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर और JSSC-CGL के जरिए प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी बने अभय कुमार तिवारी से पूछताछ के आधार पर CID ने 11 अगस्त को धर्मेंद्र को गिरफ्तार किया था।

TDPL निदेशक ने पूछताछ में बताए कई आरोप

धर्मेंद्र की गिरफ्तारी के बाद TDPL के निदेशक रामवीर सिंह से पूछताछ में जांच को कई अहम जानकारियां मिलने का दावा किया गया है। रामवीर के बयान के मुताबिक धर्मेंद्र ने FRO और PCF परीक्षाओं में अपने पसंदीदा कम से कम 12 अभ्यर्थियों को सफल कराने का दबाव बनाया था।

रामवीर के अनुसार जब कंपनी ने इस तरह के दबाव को स्वीकार नहीं किया, तब धर्मेंद्र की ओर से कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक कराने की मांग की गई। TDPL निदेशक ने जांच अधिकारियों को बताया कि उन्होंने पेपर लीक करने से साफ इनकार कर दिया और आयोग के निर्धारित नियमों के अनुसार परीक्षा कराने की बात कही।

विवाद और धमकी के भी लगाए आरोप

रामवीर सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि उनके इनकार के बाद धर्मेंद्र ने कथित तौर पर रवि नामक व्यक्ति के माध्यम से दबाव बनाने की कोशिश की। उनके अनुसार धर्मेंद्र खुद को मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े प्रभावशाली कर्मचारी के रूप में पेश करता था और झारखंड से बाहर कर देने तथा जेल भेजने जैसी धमकियां देता था।

रामवीर ने जांच के दौरान यह भी बताया कि रांची के हिनू चौक पर धर्मेंद्र के साथ उनका विवाद हुआ था। उनका दावा है कि इस घटना की जानकारी उस समय के आयोग अध्यक्ष एल खियांग्ते और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को दी गई थी, लेकिन मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

14वीं JPSC पीटी के बाद जांच ने पकड़ा व्यापक रूप

JPSC-JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी की जांच का दायरा 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम के बाद तेजी से बढ़ा। रिजल्ट जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ OMR शीट सामने आई थीं। इन्हें आधार बनाकर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए और आरोप लगाया गया कि कम अंक पाने वाले कुछ अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया।

परीक्षा परिणाम को लेकर यह सवाल भी उठाया गया कि सदस्यों के हस्ताक्षर के बिना रिजल्ट जारी किया गया। इसके अलावा पीटी परीक्षा की कटऑफ और आंसर की सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर भी अभ्यर्थियों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वालों में नाराजगी रही।

भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर झारखंड में लंबे समय तक आंदोलन भी चला। आंदोलन के बाद सरकार ने 14वीं JPSC सिविल सेवा, JSSC-CGL समेत 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था।

हालांकि, बाद में झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार के कुछ परीक्षा रद्द करने संबंधी फैसलों पर रोक लगा दी। इनमें JSSC-CGL और FSO जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। इन मामलों पर न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।

CID की मौजूदा जांच में धर्मेंद्र कुमार की कथित भूमिका से जुड़े खुलासों ने भर्ती परीक्षाओं के संचालन, परीक्षा एजेंसियों और प्रशासनिक तंत्र के बीच संभावित संबंधों को लेकर जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। अब जांच एजेंसी के सामने इन आरोपों की पुष्टि के साथ-साथ कथित लेन-देन और परीक्षा प्रक्रिया पर उसके संभावित प्रभाव की कड़ियों को स्थापित करना अहम होगा।

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