Tuesday, October 6, 2026
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सामाजिक बदलाव की मुहिम बना धनबाद से शुरू हुआ एकल अभियान : संतोष गंगवार

by उर्वशी शेखर
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राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि किसी भी समाज में स्थायी बदलाव केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार और जनभागीदारी के माध्यम से संभव होता है। दूर-दराज के ग्रामीण और वनवासी इलाकों तक शिक्षा एवं सामाजिक चेतना पहुंचाने में एकल अभियान की भूमिका उल्लेखनीय है।

राज्यपाल रविवार को आईआईटी (आईएसएम), धनबाद में आयोजित एकल अभियान के आचार्य एवं व्यास सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह गौरव की बात है कि एकल विद्यालय अभियान की शुरुआत धनबाद से हुई थी। स्वर्गीय मदनलाल अग्रवाल ने जिन ग्रामीण और वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा पहुंचाने की पहल की थी, वह प्रयास आज व्यापक सामाजिक अभियान का रूप ले चुका है।

गंगवार ने कहा कि किसी छोटे प्रयास का बड़े सामाजिक आंदोलन में बदलना समर्पण, निरंतरता और सामूहिक सहयोग की ताकत को दर्शाता है। एकल अभियान की गतिविधियां सिर्फ बच्चों को पढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य, विकास, जागरूकता और संस्कार के क्षेत्र में भी काम किया जा रहा है। गांवों में शिक्षा और जागरूकता बढ़ने से बच्चों के भविष्य के साथ उनके परिवारों और समुदायों में भी आत्मविश्वास तथा विकास की संभावनाएं मजबूत होती हैं।

शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान और क्षमता देती है, लेकिन संस्कार उसके जीवन को उचित दिशा देने का काम करते हैं। इसी उद्देश्य से एकल श्रीहरि संस्कार शिक्षा के तहत हरिकथा, सत्संग, परिवार मंगल और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए लोगों को अपनी परंपराओं और जीवन-मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में पीढ़ियों तक ज्ञान और जीवन के अनुभवों को पहुंचाने में कथा परंपरा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। एक कथाकार की भूमिका केवल कथा सुनाने तक सीमित नहीं होती। अपने विचारों और प्रेरक प्रसंगों के जरिए वह लोगों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकता है। इस लिहाज से गांव-गांव जाकर हरिकथा, सत्संग और सामाजिक जागरूकता का संदेश पहुंचाने वाले व्यास कथाकारों का योगदान महत्वपूर्ण है।

विकास के साथ विरासत का संरक्षण जरूरी

झारखंड की जनजातीय संस्कृति और परंपराओं का उल्लेख करते हुए गंगवार ने कहा कि प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक भावना और सामाजिक सहभागिता राज्य की विशिष्ट पहचान का हिस्सा हैं। आधुनिक विकास की प्रक्रिया के साथ इन सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं को सुरक्षित रखना भी समाज की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि व्यापक सामाजिक विकास के लिए सरकार के प्रयासों के साथ सामाजिक संगठनों, संस्थाओं और आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। सामूहिक प्रयासों से ही शिक्षा, संस्कार, सामाजिक चेतना और विकास को समाज के अंतिम छोर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।

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