Tuesday, October 6, 2026
Home » TSPC की कमान अब शशिकांत गंझू के हाथ, 10 लाख के इनामी नक्सली पर एजेंसियों की नजर

TSPC की कमान अब शशिकांत गंझू के हाथ, 10 लाख के इनामी नक्सली पर एजेंसियों की नजर

by उर्वशी शेखर
0 comments

वाराणसी में टीएसपीसी प्रमुख बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता के यूपी एटीएस के साथ मुठभेड़ में मारे जाने के बाद संगठन के भीतर नेतृत्व को लेकर बदलाव की स्थिति बनी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 10 लाख रुपये का इनामी शशिकांत गंझू अब संगठन के प्रमुख सक्रिय चेहरों में शामिल है और उसे टीएसपीसी की कमान संभालने वाला प्रमुख व्यक्ति माना जा रहा है।

पलामू के मनातू थाना क्षेत्र के केदल गांव का निवासी शशिकांत लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। झारखंड सरकार ने उसकी गिरफ्तारी पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। उसके खिलाफ एनआईए से जुड़े मामले भी बताए जाते हैं। पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा और हजारीबाग समेत झारखंड के कई जिलों तथा उत्तर प्रदेश में उसके खिलाफ 50 से अधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

कई मुठभेड़ों में पुलिस को चकमा देने का दावा

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, शशिकांत की नक्सली गतिविधियों से जुड़ाव 2000 के दशक से रहा है। शुरुआती दौर में वह माओवादी संगठन के ओए सदस्य के तौर पर सक्रिय था। बाद में बृजेश गंझू के संपर्क में आने के बाद वह टीएसपीसी से जुड़ा। पलामू और चतरा उसके प्रमुख गतिविधि क्षेत्रों में रहे हैं।

पुलिस के अनुसार, वह अत्याधुनिक हथियारों से लैस रहता है और उसके पास एके-47 होने की जानकारी भी सामने आई है। वर्ष 2010 के बाद सुरक्षा बलों के साथ करीब 13 मुठभेड़ों में उसके बच निकलने का दावा किया गया है।

सितंबर 2025 में मनातू थाना क्षेत्र के केदल में पुलिस और टीएसपीसी उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस कार्रवाई में दो पुलिसकर्मी शहीद हुए थे, जबकि शशिकांत मौके से निकलने में सफल रहा था। इसके बाद से सुरक्षा एजेंसियों के लिए उसकी तलाश और महत्वपूर्ण हो गई।

संगठन को फिर सक्रिय करने की चुनौती

बृजेश गंझू की मौत के बाद टीएसपीसी के कई प्रमुख कमांडरों में शशिकांत को सक्रिय चेहरा माना जा रहा है। संगठन के कई अन्य प्रमुख सदस्य जेल में हैं या सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ों में मारे जा चुके हैं। हाल ही में जेल से बाहर आया नथुनी सिंह भी शशिकांत के साथ जुड़ा बताया जा रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि शशिकांत संगठन के बचे हुए कैडरों को फिर से संगठित करने की कोशिश कर सकता है। पुलिस की पूर्व जांच में उसके अंधविश्वास से जुड़े होने की बात भी सामने आई थी। एजेंसियों के मुताबिक, बड़ी घटनाओं के बाद कथित तौर पर बलि जैसी गतिविधियों से उसके जुड़ाव की जानकारी मिली थी। केदल क्षेत्र को लंबे समय तक उसके प्रभाव वाले इलाके के तौर पर देखा जाता रहा है।

उत्तर प्रदेश में भी सक्रियता के संकेत

टीएसपीसी से जुड़े कमांडरों की गतिविधियां झारखंड तक सीमित नहीं रही हैं। वर्ष 2025 में पलामू में सुरक्षा बलों से बच निकलने वाले टीएसपीसी कमांडर नगीना को बाद में वाराणसी क्षेत्र में पकड़ा गया था। इसके बाद झारखंड पुलिस ने उससे पूछताछ की थी।

पूछताछ के दौरान शशिकांत और नगीना के उत्तर प्रदेश पहुंचने से संबंधित जानकारी भी सामने आने की बात कही गई थी। इसी दौरान यूपी एटीएस की कार्रवाई में नगीना गिरफ्त में आया, जबकि शशिकांत कथित तौर पर वहां से निकलने में सफल रहा।

इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां टीएसपीसी से जुड़े लोगों की गतिविधियों पर नजर रख रही थीं। इसी क्रम में वाराणसी में हुई यूपी एटीएस की कार्रवाई में बृजेश गंझू मारा गया।

अब शशिकांत पर केंद्रित हुआ सुरक्षा एजेंसियों का फोकस

बृजेश की मौत के बाद झारखंड पुलिस, एनआईए और अन्य केंद्रीय एजेंसियां अब शशिकांत गंझू की गतिविधियों और संपर्कों की जानकारी जुटाने में लगी हैं। उसके खिलाफ दर्ज मामलों, संभावित ठिकानों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की भी पड़ताल की जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियों के सामने फिलहाल दो प्रमुख चुनौतियां हैं; टीएसपीसी के बचे हुए नेटवर्क की पहचान करना और संगठन के सक्रिय नेतृत्व तक पहुंचना। 10 लाख रुपये के इनामी शशिकांत की तलाश अब इसी अभियान का अहम हिस्सा बन गई है।

You may also like

Leave a Comment