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तेलंगाना में विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने विधानसभा परिसर में पार्टी के विधायकों और एमएलसी के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार को लेकर राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला से हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि सदन में प्रवेश के दौरान पुलिस ने उसके नेताओं के साथ बल प्रयोग किया और बाद में उन्हीं के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कर दिए गए।
BRS के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव के नेतृत्व में पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने तेलंगाना लोक भवन में राज्यपाल से मुलाकात की। नेताओं ने उन्हें ज्ञापन सौंपते हुए राज्य के मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक हालात की जानकारी दी। मुलाकात के बाद रामाराव ने कहा कि राज्यपाल से संवैधानिक अधिकारों के तहत मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया है।
‘संवैधानिक व्यवस्था कमजोर हुई’, BRS का आरोप
रामाराव ने आरोप लगाया कि राज्य में संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को नुकसान पहुंच रहा है। BRS ने राज्यपाल से मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी से सरकार के कामकाज से संबंधित जानकारी लेने और संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप शासन सुनिश्चित करने की अपील की।
पार्टी नेताओं के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को उन घटनाओं से जुड़े साक्ष्य भी सौंपे, जिनमें BRS विधायक और एमएलसी कांग्रेस सरकार के करीब 1,000 दिनों के कार्यकाल की कथित विफलताओं के विरोध में काली टी-शर्ट पहनकर विधानसभा जा रहे थे।
BRS का दावा है कि इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों ने नेताओं को रोकने के लिए बल प्रयोग किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि कुछ महिला सदस्यों के साथ भी कथित तौर पर दुर्व्यवहार हुआ। नेताओं के मुताबिक, सदस्यों को धक्का देने, पकड़ने और घसीटने के अलावा महिला सदस्यों के बाल खींचने तथा कपड़े खींचने जैसी घटनाएं भी हुईं।

पुलिस पर कार्रवाई न होने का आरोप
BRS ने राज्यपाल के सामने यह भी आरोप रखा कि पार्टी के नेता जब पुलिस आयुक्त के कार्यालय पहुंचे तो उनकी शिकायत पर मामला दर्ज नहीं किया गया। इसके उलट, पार्टी का दावा है कि घटना में शामिल विधायकों के खिलाफ ही आपराधिक मामले दर्ज कर दिए गए।
पार्टी ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट के निर्देश का भी दिया हवाला
BRS प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया कि हाईकोर्ट पहले ही कथित पुलिस ज्यादती के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश दे चुका है। इसके बावजूद, पार्टी के अनुसार अब तक किसी संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।
इसके साथ ही BRS ने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) के एर्रावली स्थित आवास पर कथित हमले और विपक्षी नेताओं के खिलाफ हिंसा के आरोप भी राज्यपाल के सामने रखे। पार्टी ने दावा किया कि KCR को खतरा है और इस संबंध में लगाए गए गंभीर आरोपों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई है।
BRS ने राज्यपाल से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संवैधानिक स्तर पर हस्तक्षेप करने और राज्य में कानून-व्यवस्था तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज को लेकर आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
हैदराबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट