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झारखंड में खनन से जुड़े MMDR संशोधन कानून को लेकर केंद्र और राज्य के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस, झामुमो और आरजेडी जहां संशोधन के प्रावधानों को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कानून को लेकर लोगों के बीच गलतफहमी पैदा की जा रही है।
बीजेपी की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संशोधित कानून का मकसद खनन क्षेत्र में प्रक्रियाओं को सरल बनाना, निजी निवेश को प्रोत्साहित करना और रोजगार के नए अवसर तैयार करना है। उन्होंने इसे देश की दीर्घकालिक आर्थिक विकास रणनीति से जोड़ते हुए कहा कि खनन और उद्योग क्षेत्र को गति दिए बिना विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल होगा।
‘विकसित भारत’ के लक्ष्य से जोड़ा संशोधन
अन्नपूर्णा देवी के मुताबिक, वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में नीतिगत स्पष्टता और समान व्यवस्था जरूरी है। उनका कहना है कि MMDR कानून में बदलाव के जरिए खनन उद्योग से जुड़ी कंपनियों के सामने आने वाली कुछ कानूनी और कर संबंधी जटिलताओं को कम करने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने दावा किया कि इससे कारोबार के लिए अधिक स्थिर वातावरण तैयार होगा और खनन क्षेत्र में नई परियोजनाओं तथा निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है।
टैक्स को लेकर केंद्र का तर्क
केंद्रीय मंत्री ने संशोधन के पीछे टैक्स व्यवस्था को लेकर भी सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र में काम शुरू होने के बाद पुराने समय से जुड़ी कर देनदारियों का निर्धारण किए जाने से कंपनियों के सामने वित्तीय अनिश्चितता पैदा होती थी।

उनके अनुसार, संशोधित प्रावधानों का उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों को स्पष्ट करना और कंपनियों के लिए कर संबंधी व्यवस्था को अधिक पूर्वानुमेय बनाना है। केंद्र का तर्क है कि इससे उद्योगों को लंबे समय की योजना बनाने में सुविधा होगी।
झारखंड सरकार पर भी हमला
अन्नपूर्णा देवी ने झारखंड सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार अधिक राजस्व हासिल करने की कोशिश में MMDR संशोधन का विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों में विस्तार होने से निवेश के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं, जिसका लाभ राज्य को मिलना चाहिए।
हालांकि, इस मुद्दे पर झारखंड सरकार और विपक्ष की आपत्तियां केवल टैक्स वसूली तक सीमित नहीं हैं। विवाद का एक प्रमुख पहलू खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व और राज्यों के कराधान अधिकारों से जुड़ा है। यही वजह है कि MMDR संशोधन आने वाले दिनों में भी केंद्र और झारखंड सरकार के बीच राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बना रह सकता है।