Wednesday, October 7, 2026
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भूगर्भ जल का दोहन रोकने के लिये निगम ने बदले नियम, 4 इंच की सीमा और वर्षा जल संचयन अनिवार्य

अब घरों में ट्यूबवेल या बोरवेल कराने के लिए नगर निगम की पूर्व अनुमति लेना जरूरी होगा।

by उर्वशी शेखर
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राजधानी में लगातार नीचे जा रहे भूगर्भ जलस्तर और गर्मी के दौरान पैदा होने वाले जल संकट को देखते हुए रांची नगर निगम ने घरेलू बोरिंग को लेकर नियम कड़े कर दिए हैं। अब घरों में ट्यूबवेल या बोरवेल कराने के लिए नगर निगम की पूर्व अनुमति लेना जरूरी होगा। घरेलू उपयोग के लिए अधिकतम 4 इंच व्यास की बोरिंग की ही अनुमति दी जाएगी।

नगर निगम की ओर से जारी आम सूचना में कहा गया है कि बोरिंग की अनुमति केवल उन्हीं भवनों को दी जाएगी, जहां वर्षाजल संचयन की व्यवस्था मौजूद है। जिन घरों में फिलहाल रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं है, उन्हें पहले इसकी व्यवस्था करनी होगी और उसके बाद ही बोरिंग की मंजूरी मिलेगी।

भूगर्भ जल दोहन रोकने पर जोर

नगर निगम के मुताबिक शहर में रिग मशीन और वाहनों के जरिए लगातार बड़ी संख्या में बोरिंग कराए जाने से भूजल स्तर पर दबाव बढ़ रहा है। इसका असर गर्मी में साफ दिखाई देता है, जब कई इलाकों में पानी की समस्या गंभीर हो जाती है।

नई व्यवस्था के तहत घरेलू बोरिंग की अधिकतम गहराई भी संबंधित इलाके के भूजल स्तर के अनुसार तय होगी। बोरिंग पूरी होने के बाद आवेदक को इसकी गहराई और उस स्थान पर उपलब्ध जलस्तर की जानकारी नगर निगम को देनी होगी।

बोरिंग की अनुमति के लिए आवेदक को पहचान पत्र, होल्डिंग रसीद, जीपीएस वाली तस्वीर और अन्य जरूरी अनुमति संबंधी दस्तावेज जमा करने होंगे। बोरिंग केवल निजी जमीन पर ही कराई जा सकेगी।

सरकारी जमीन, सड़क, नदी या नाले की जमीन पर बोरिंग की अनुमति नहीं होगी। ऐसे स्थानों पर नियम तोड़कर बोरिंग कराने की स्थिति में भवन मालिक के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है और संबंधित बोरिंग को सील भी किया जा सकता है।

मंजूरी के 15 दिन के भीतर करानी होगी बोरिंग

नगर निगम ने अनुमति की समयसीमा भी तय कर दी है। मंजूरी मिलने के बाद 15 दिनों के अंदर बोरिंग कराना जरूरी होगा। तय अवधि में काम शुरू नहीं होने पर अनुमति स्वत: निरस्त मानी जाएगी। 15 दिन के बाद बोरिंग की अनुमति केवल विशेष परिस्थितियों में ही दी जा सकेगी।

नए शुल्क ढांचे के तहत 5,000 वर्गफीट तक के आवासीय भवन के लिए बोरिंग अनुमति शुल्क 2,500 रुपये निर्धारित है। इससे बड़े आवासीय भवनों के लिए यह शुल्क 5,000 रुपये होगा।

व्यावसायिक भवनों के लिए 1,000 वर्गफीट तक 10,000 रुपये शुल्क लगेगा। 1,000 वर्गफीट से अधिक क्षेत्रफल वाले व्यावसायिक भवनों के लिए 10 रुपये प्रति वर्गफीट के हिसाब से शुल्क निर्धारित किया गया है।

बिना अनुमति बोरिंग पर भारी जुर्माना

नगर निगम ने बिना मंजूरी बोरिंग कराने वालों के लिए कड़े आर्थिक प्रावधान किए हैं। आवासीय परिसर में बिना अनुमति बोरिंग मिलने पर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं व्यावसायिक बोरिंग के मामले में जुर्माने की राशि एक लाख रुपये तक होगी। इसके अलावा बोरिंग को सील करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

नगर निगम ने भविष्य में इन नियमों, शर्तों और शुल्क में बदलाव का अधिकार भी अपने पास रखा है।

नगर आयुक्त ने लोगों से की नियम मानने की अपील

नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने कहा कि बोरिंग को लेकर नगर निगम की नई व्यवस्था प्रभावी है और नागरिकों को इसका पालन करना चाहिए। उन्होंने बिना अनुमति बोरिंग कराने से बचने की अपील करते हुए कहा कि नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने के साथ बोरिंग सील करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों का उद्देश्य बोरिंग पर पूरी तरह रोक लगाना नहीं, बल्कि भूजल के अनियंत्रित दोहन को नियंत्रित करना और शहर के जलस्रोतों को सुरक्षित रखना है। नगर निगम ने नागरिकों से बोरिंग से पहले अनुमति लेने के साथ रेन वाटर हार्वेस्टिंग को प्राथमिकता देने की अपील की है।

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