Wednesday, October 7, 2026
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खनिज सेस के अधिकार पर झारखंड-केंद्र आमने-सामने, अक्टूबर में विधानसभा का विशेष सत्र संभव

by उर्वशी शेखर
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खनिजों पर सेस लगाने के राज्यों के अधिकार को सीमित करने वाले केंद्र के कदम के विरोध में झारखंड सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक 5 और 6 अक्टूबर को विशेष सत्र आयोजित किया जा सकता है। इस पर 25 सितंबर को होने वाली राज्य कैबिनेट की बैठक में फैसला लिए जाने की संभावना है।

मामला राज्य के राजस्व से भी सीधे जुड़ा है। झारखंड के 2026-27 के बजट में खनिज-धारित भूमि सेस से करीब 14,656 करोड़ रुपये की आय का अनुमान रखा गया है। ऐसे में सेस लगाने की व्यवस्था प्रभावित होने पर राज्य के राजस्व पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजने की तैयारी

राज्य सरकार इस मुद्दे को विधानसभा के मंच से उठाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित विशेष सत्र में केंद्र के फैसले के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर उसे केंद्र सरकार तक भेजे जाने की संभावना है। झारखंड सरकार इस मामले में न्यायिक विकल्प पर भी विचार कर रही है और सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की तैयारी की खबर है।

सत्तारूढ़ झामुमो और कांग्रेस ने भी खनिज सेस से जुड़े राज्य के अधिकार को बनाए रखने की मांग उठाई है। राज्य सरकार का तर्क है कि खनन से होने वाले पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का सामना झारखंड को करना पड़ता है, इसलिए खनिज संसाधनों से जुड़े राजस्व में राज्य की भूमिका महत्वपूर्ण है।

वित्त मंत्री ने उठाया राजस्व और अधिकार का मुद्दा

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर लगातार केंद्र से राज्यों को खनिजों पर सेस लगाने का अधिकार बहाल करने की मांग कर रहे हैं। हाल में वित्त मंत्रियों के सम्मेलन में भी उन्होंने यह मुद्दा उठाया था। उनके मुताबिक, खनिज संपदा वाले राज्यों को अपने संसाधनों से जुड़े राजस्व अधिकार मिलने चाहिए।

झारखंड सरकार का कहना है कि यदि सेस लगाने की अनुमति राज्य को नहीं दी जाती है, तो खनिज संपदा से होने वाले संभावित राजस्व नुकसान की भरपाई की व्यवस्था केंद्र को करनी चाहिए। इस मुद्दे पर सरकार विधानसभा के विशेष सत्र के जरिए अपना पक्ष औपचारिक रूप से दर्ज कराने की तैयारी में है।

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