Tuesday, October 6, 2026
Home » OMR में हेरफेर, डेटा डिलीट और संदिग्ध संपर्क… JPSC केस में CID के चौंकाने वाले दावे

OMR में हेरफेर, डेटा डिलीट और संदिग्ध संपर्क… JPSC केस में CID के चौंकाने वाले दावे

by उर्वशी शेखर
0 comments

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार की जांच कर रही CID को पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते की भूमिका को लेकर कई अहम सुराग मिलने का दावा किया गया है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के मुताबिक, पहली छापेमारी के बाद डिजिटल उपकरणों और उनमें मौजूद डेटा से छेड़छाड़ की गई थी। CID की फॉरेंसिक जांच में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से डेटा हटाने, स्टोरेज में बदलाव और अन्य तरीके से डिजिटल साक्ष्यों को नुकसान पहुंचाए जाने की बात सामने आई है।

छापेमारी के बाद इस्तीफा, लैपटॉप-पेन ड्राइव साथ ले जाने का दावा

CID के अनुसार, मामले में पहली छापेमारी 22 जुलाई 2026 को की गई थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इसके तुरंत बाद ख्यांग्ते ने JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और आयोग के आधिकारिक इस्तेमाल वाला लैपटॉप तथा पेन ड्राइव अपने साथ ले गए।

फॉरेंसिक जांच के दौरान इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की पड़ताल में डेटा डिलीट किए जाने और स्टोरेज के साथ छेड़छाड़ के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसी इसे मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को प्रभावित करने की कोशिश के तौर पर देख रही है।

CDR में संदिग्ध लोगों से लगातार संपर्क का दावा

जेल में बंद पूर्व JPSC अध्यक्ष के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच में भी CID को महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की बात कही गई है। एजेंसी के मुताबिक, ख्यांग्ते परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के संदिग्ध लोगों के साथ लगातार फोन पर संपर्क में थे।

जांच में केवल डिजिटल साक्ष्यों से जुड़ी बातें ही सामने नहीं आई हैं। CID का दावा है कि वन क्षेत्र अधिकारी (FRO) परीक्षा की 350 से अधिक OMR शीट और सहायक वन संरक्षक (ACF) परीक्षा की 150 से अधिक OMR शीट में कथित तौर पर भौतिक और डिजिटल स्तर पर बदलाव किए गए। जांच एजेंसी के अनुसार, इन हेरफेर का उद्देश्य कुछ पसंदीदा अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाना था।

1000 पन्नों की केस डायरी में वित्तीय लेन-देन का भी उल्लेख

CID ने अदालत में करीब 1000 पन्नों की केस डायरी पेश की है। इसमें आरोपियों और गवाहों के बयानों के आधार पर परीक्षा से जुड़े लोगों के बीच कथित वित्तीय लेन-देन और कमीशन की बात दर्ज होने का दावा किया गया है।

केस डायरी में एल. ख्यांग्ते और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों के बीच वित्तीय संबंधों के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

परीक्षा नियंत्रक की आपत्ति के बाद जिम्मेदारी में बदलाव

जांच के दौरान JPSC की तत्कालीन कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। CID के मुताबिक, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा ने TDPL एजेंसी की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई थी। आरोप है कि एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उनसे परीक्षा से जुड़ा प्रभार वापस ले लिया गया।

इसके बाद परीक्षा की जिम्मेदारी उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता को सौंपे जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी के अनुसार, दूसरे विभाग में तबादला होने के बावजूद उन्हें JPSC में बनाए रखा गया और परीक्षा से संबंधित संवेदनशील कार्य उनके पास ही रहे।

CID की जांच में सामने आए ये दावे अब मामले की आगे की न्यायिक कार्यवाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अदालत में पेश केस डायरी और डिजिटल फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की अगली कड़ियां तय होने की संभावना है।

You may also like

Leave a Comment