Tuesday, October 6, 2026
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8 घंटे की ड्यूटी, 50% कटौती की सीमा… नए श्रम नियमों में क्या-क्या बदलेगा?

by उर्वशी शेखर
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राज्य में श्रमिकों के वेतन और कामकाज की व्यवस्था को लेकर नए नियमों का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। इसमें न्यूनतम मजदूरी तय करने के मानक, काम के घंटे, साप्ताहिक छुट्टी, ओवरटाइम, वेतन कटौती और बोनस से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट किया गया है। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य महंगाई के बीच श्रमिकों की बुनियादी जरूरतों के अनुरूप मजदूरी सुनिश्चित करना है।

परिवार और रोजमर्रा की जरूरतों को बनाया आधार

न्यूनतम मजदूरी की गणना के लिए पति-पत्नी और दो बच्चों वाले परिवार को मानक माना गया है। इसे तीन वयस्क उपभोग इकाइयों के बराबर रखा गया है। प्रत्येक इकाई के लिए प्रतिदिन 2700 कैलोरी की जरूरत को आधार बनाया गया है। परिवार के कपड़े, आवास, ईंधन और बिजली के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आकस्मिक खर्चों को भी गणना में शामिल किया गया है।

एक दिन की मजदूरी से प्रति घंटे की दर निकालने के लिए उसे आठ से विभाजित किया जाएगा, जबकि मासिक मजदूरी के लिए दैनिक दर को 26 से गुणा किया जाएगा।

48 घंटे से ज्यादा काम नहीं, लगातार 10 दिन काम पर रोक

प्रस्तावित नियमों के मुताबिक सामान्य कार्यदिवस में आठ घंटे काम का प्रावधान होगा और साप्ताहिक कार्य सीमा 48 घंटे रहेगी। काम और विश्राम समेत कुल अवधि 12 घंटे से अधिक नहीं हो सकेगी। छह दिन काम करने वाले कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश देना होगा और विश्राम के दिन काम लेने पर वैकल्पिक छुट्टी देनी होगी।

किसी कर्मचारी से लगातार 10 दिन तक बिना पूरे साप्ताहिक विश्राम के काम नहीं कराया जा सकेगा। रात की पाली के लिए भी समय की गणना को लेकर अलग व्यवस्था तय की गई है।

मनमानी वेतन कटौती पर लगेगी सीमा

कर्मचारी के वेतन से होने वाली कुल कटौती किसी वेतन अवधि में 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेगी। निर्धारित सीमा से अधिक रकम होने पर उसे अगली अवधि में किस्तों के जरिए वसूला जाएगा।

वेतन से नुकसान की भरपाई के लिए कटौती करने से पहले कर्मचारी को लिखित रूप से कारण बताया जाना और अपना पक्ष रखने का अवसर देना जरूरी होगा। अग्रिम राशि की वसूली भी 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर ही की जाएगी।

बोनस में आगे बढ़ेगा अतिरिक्त सरप्लस

ड्राफ्ट में बोनस की गणना और ‘सेट ऑन-सेट ऑफ’ व्यवस्था को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं। निर्धारित सीमा से अधिक उपलब्ध सरप्लस को आगामी लेखा वर्षों में समायोजित करने की अनुमति होगी, हालांकि इसके लिए कुल वेतन के 20 प्रतिशत की अधिकतम सीमा लागू रहेगी।

प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद मजदूरी निर्धारण से लेकर कार्य अवधि और भुगतान संबंधी कई प्रक्रियाओं के लिए एक स्पष्ट नियामकीय ढांचा तैयार होने की उम्मीद है।

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