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तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की हैदराबाद के निजाम को लेकर की गई टिप्पणी ने राज्य की राजनीतिक चर्चाओं को नया विषय दे दिया है। एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने निजाम के शासनकाल के दौरान विकसित की गई कई परियोजनाओं और संस्थानों का उल्लेख करते हुए उनके प्रशासनिक दृष्टिकोण की सराहना की।
रेवंत रेड्डी के मुताबिक, निजाम शासन के दौरान जमीन से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल केवल सरकारी खर्च चलाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसका एक बड़ा हिस्सा आधारभूत ढांचे और सार्वजनिक संस्थानों के निर्माण पर लगाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस दौर में तैयार हुई कई परियोजनाएं आज भी तेलंगाना की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा हैं।
निजाम के प्रशासनिक फैसलों का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने निजाम को एक प्रभावशाली शासक बताते हुए कहा कि उन्होंने बड़े भू-भाग पर शासन करते हुए राजस्व व्यवस्था की उपयोगिता को समझा और उससे प्राप्त संसाधनों को विकास कार्यों में लगाने पर जोर दिया।
अपने संबोधन में उन्होंने निजाम सागर परियोजना, निजाम शुगर फैक्ट्री, निजाम कॉलेज, उस्मानिया यूनिवर्सिटी, लेजिसलेटिव काउंसिल भवन, तेलंगाना हाईकोर्ट, सिटी कॉलेज और उस्मानिया अस्पताल जैसी संस्थाओं और परियोजनाओं का उदाहरण दिया। उनका कहना था कि इनमें से कई संस्थान आज भी काम कर रहे हैं और राज्य के विकास में योगदान दे रहे हैं।
निजाम के शासन को लेकर पुरानी बहस फिर चर्चा में
रेवंत रेड्डी की टिप्पणी को निजाम के शासन के केवल नकारात्मक पक्ष पर जोर देने वाली राजनीतिक धारणाओं के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के कामकाज का मूल्यांकन करते समय उनके विकास संबंधी योगदान को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

हैदराबाद के निजाम 1947 में भारत की स्वतंत्रता से पहले तत्कालीन हैदराबाद रियासत के शासक थे। स्वतंत्रता के बाद भारतीय संघ में हैदराबाद के विलय तक उनकी सत्ता कायम रही। निजाम के शासन को लेकर इतिहास और राजनीति में लंबे समय से अलग-अलग मत रहे हैं। एक ओर उनके शासनकाल में बनी संस्थाओं और परियोजनाओं का उल्लेख किया जाता है, वहीं दूसरी ओर उस दौर की सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर आलोचनाएं भी सामने आती रही हैं।
बयान के राजनीतिक असर पर नजर
मुख्यमंत्री की टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि निजाम को लेकर तेलंगाना की राजनीति में अलग-अलग दलों और नेताओं के रुख लंबे समय से भिन्न रहे हैं। ऐसे में रेवंत रेड्डी द्वारा निजाम के विकास कार्यों की सार्वजनिक रूप से सराहना किए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री के बयान ने फिलहाल एक ऐसी ऐतिहासिक बहस को फिर सामने ला दिया है, जिसमें निजाम के शासन का आकलन उनके प्रशासनिक और विकास कार्यों के साथ-साथ उस दौर की विवादित राजनीतिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
हैदराबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट