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तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद के बीच ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने सोमवार को अपनी नई चुनावी पहचान सार्वजनिक कर दी। चुनाव आयोग की ओर से अंतरिम तौर पर आवंटित ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न को अब नए लोगो में प्रमुखता से जगह दी गई है। नए लोगो में नीले रंग की पृष्ठभूमि पर सफेद अक्षरों में ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ लिखा गया है। डिजाइन में तिरंगे के तीन रंगों को भी शामिल किया गया है।
यह बदलाव उस समय आया है जब चुनाव आयोग ने पार्टी के मूल नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को फिलहाल इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। आयोग ने विवाद में शामिल दोनों गुटों को अलग-अलग अस्थायी नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम के साथ फुटबॉल खिलाड़ी का निशान मिला है, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और लिफाफा चुनाव चिह्न दिया गया है।
रेजीनगर में पहली चुनावी टक्कर
नई पहचान के साथ दोनों गुटों की राजनीतिक परीक्षा पश्चिम बंगाल के आगामी उपचुनावों में होगी। रेजीनगर सीट पर दोनों पक्षों के उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जिससे यहां मुकाबला सीधे तौर पर दोनों तृणमूल गुटों के बीच दिखाई देगा। आयोग ने दोनों गुटों को नए नाम और प्रतीक के साथ चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी है।
वहीं नंदीग्राम में समीकरण अलग हो गया है। यहां ममता बनर्जी के गुट ने अपने उम्मीदवार को मैदान से हटाकर कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान के समर्थन का फैसला किया है। हालांकि, इसके बाद प्रधान की गिरफ्तारी ने इस सीट के चुनावी घटनाक्रम को और जटिल बना दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें पूर्वी मेदिनीपुर के खेजुरी थाने में दर्ज 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया और 5 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

17 सितंबर को आयोग ने लिया था अंतरिम फैसला
तृणमूल के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद पर चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनी थीं। इसके बाद आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत मूल पार्टी नाम और ‘फूल और घास’ वाले चिह्न को दोनों गुटों के लिए रोक दिया। इसके साथ ही दोनों पक्षों से नए नाम और स्वतंत्र चुनाव चिह्न के विकल्प मांगे गए, ताकि आगामी उपचुनावों की प्रक्रिया प्रभावित न हो।
अगले दिन आयोग ने दोनों गुटों के लिए अलग-अलग अस्थायी पहचान तय कर दी। आयोग के अनुसार, यह व्यवस्था फिलहाल संबंधित उपचुनावों के लिए है और पार्टी के मूल नाम एवं चुनाव चिह्न पर अंतिम निर्णय बाद में किया जाएगा।
ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
चुनाव आयोग के इस अंतरिम आदेश को ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सोमवार को उनकी ओर से मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की गई। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है और संकेत दिया है कि दूसरे पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
इस तरह तृणमूल कांग्रेस का विवाद अब दो मोर्चों पर आगे बढ़ रहा है; एक तरफ दोनों गुट नए नाम और चुनाव चिह्न के साथ उपचुनाव की तैयारी कर रहे हैं, तो दूसरी ओर पार्टी के मूल नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न पर अंतिम अधिकार का मामला न्यायिक और चुनावी प्रक्रिया में लंबित है।