Wednesday, October 7, 2026
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राज्यपाल से मिले विदेशी छात्र और शोधार्थी, कहा- भारत की ज्ञान परंपरा और झारखंड की विरासत को करीब से जानें

by उर्वशी शेखर
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रांची स्थित लोक भवन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के माध्यम से भारत में उच्च शिक्षा और शोध कर रहे विभिन्न देशों के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा, सांस्कृतिक विविधता और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग के महत्व पर चर्चा की।

राज्यपाल ने कहा कि भारत की पहचान सदियों से ज्ञान और शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में रही है। तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसे संस्थानों में प्राचीन समय में दूर-दराज के देशों से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने पहुंचते थे। उनके अनुसार, अलग-अलग सभ्यताओं के बीच ज्ञान और विचारों के आदान-प्रदान की यह परंपरा आज भी भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करती है।

शिक्षा को देशों के बीच संबंधों का सेतु बताया

गंगवार ने कहा कि श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, इराक के अलावा अफ्रीका और मध्य-पूर्व के देशों से विद्यार्थियों का भारत आकर पढ़ाई और शोध करना दोनों पक्षों के बीच बढ़ते शैक्षणिक और सांस्कृतिक रिश्तों को दर्शाता है।

उन्होंने भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा, संवाद और आपसी अनुभव अलग-अलग देशों के लोगों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध और भगवान महावीर की भूमि भारत ने शांति, अहिंसा, करुणा और सद्भाव जैसे मूल्यों का संदेश दुनिया को दिया है, जिनकी उपयोगिता वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में और बढ़ गई है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बढ़ते महत्व का किया जिक्र

राज्यपाल ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में देशों के बीच सहयोग लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने का उल्लेख किया।

उन्होंने नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का भी जिक्र किया और इसे वैश्विक मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी का उदाहरण बताया।

विदेशी विद्यार्थियों से झारखंड को जानने की अपील

झारखंड की चर्चा करते हुए राज्यपाल ने राज्य की जनजातीय परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संपदा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि झारखंड अपने जंगलों, पहाड़ियों, झरनों और खनिज संसाधनों के साथ विशिष्ट पहचान रखता है।

उन्होंने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा सहित स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने वाले अनेक स्वतंत्रता सेनानियों की भूमिका का भी उल्लेख किया। राज्यपाल ने विदेशी विद्यार्थियों से अपील की कि वे झारखंड में अपने प्रवास के दौरान यहां की संस्कृति, जनजातीय जीवन और प्राकृतिक विरासत को करीब से समझने का प्रयास करें।

भारत की यादें साथ लेकर लौटें विद्यार्थी

गंगवार ने विद्यार्थियों से कहा कि भारत में पढ़ाई और शोध के साथ उन्हें देश के इतिहास, विविध सांस्कृतिक परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को समझने का अवसर भी लेना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसे अनुभव केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विद्यार्थियों की व्यक्तिगत यात्रा को भी समृद्ध करते हैं।

राज्यपाल ने विदेशी विद्यार्थियों को भारत और उनके अपने देशों के बीच मैत्री और आपसी समझ के वाहक के रूप में बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि अध्ययन पूरा करने के बाद जब ये विद्यार्थी अपने देशों में लौटेंगे, तो भारत में बिताए समय की यादें और यहां के अनुभव अपने परिवार, मित्रों और समाज के साथ साझा करेंगे।

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