Wednesday, October 7, 2026
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झारखंड में वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म पर बड़ा फोकस, 75 से अधिक उप-आवंटन जारी

by उर्वशी शेखर
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झारखंड में जंगलों की हरियाली बढ़ाने, वन्यजीवों के संरक्षण और प्रकृति आधारित पर्यटन को नई गति देने के लिए वन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। सितंबर के अंत तक विभाग की ओर से अलग-अलग योजनाओं के लिए 75 से अधिक वित्तीय उप-आवंटन आदेश जारी किए जा चुके हैं। इनमें पौधरोपण और उसके रखरखाव से लेकर नदी तट संरक्षण, शहरी वानिकी, जंगलों के प्रबंधन, इको-टूरिज्म और वन्यजीव संरक्षण तक कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं।

राज्य में निजी और बंजर भूमि को हराभरा बनाने के लिए मुख्यमंत्री जन वन योजना पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। योजना के तहत लगाए गए फलदार और काष्ठ प्रजाति के पौधों की देखभाल के लिए दूसरे और तीसरे वर्ष के अनुरक्षण कार्यों की राशि जारी की गई है।

इससे किसानों और निजी भूमि मालिकों को पौधों के शुरुआती वर्षों में उनकी देखभाल और संरक्षण के लिए आर्थिक सहायता मिल सकेगी। विभाग का जोर केवल पौधरोपण तक सीमित न रहकर लगाए गए पौधों को सुरक्षित रखने और उन्हें विकसित करने पर भी है।

नदी किनारे बढ़ेगी हरियाली, कटाव पर भी लगेगी रोक

नदी तटों पर पौधरोपण को भी वन विभाग की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। अलग-अलग वन प्रमंडलों में पहले से लगाए गए पौधों के तीसरे, चौथे, पांचवें और छठे वर्ष के अनुरक्षण कार्यों के लिए वित्तीय प्रावधान किए गए हैं।

नदी किनारे हरियाली बढ़ने से मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करने के साथ जल स्रोतों के संरक्षण में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

शहरों में भी बढ़ेगा ग्रीन कवर

शहरी क्षेत्रों में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए शहरी वानिकी और गैबियन आधारित पौधरोपण पर भी काम किया जा रहा है। पौधों की सुरक्षा के लिए पीवीसी और बांस से बने गैबियन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

चाईबासा, गोड्डा, दुमका और रांची समेत कई वन प्रमंडलों में इन कार्यों के लिए लगातार वित्तीय उप-आवंटन किए गए हैं। इसका उद्देश्य शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ पर्यावरणीय गुणवत्ता और सार्वजनिक स्थानों के सौंदर्यीकरण को बेहतर करना है।

जंगलों के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर

वनों की उत्पादकता और प्राकृतिक पुनर्जनन को मजबूत करने के लिए सिल्विकल्चरल ऑपरेशन से संबंधित योजनाओं को भी आगे बढ़ाया गया है। इनके तहत वन क्षेत्रों के विकास, जल एवं मृदा संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से जुड़े काम किए जा रहे हैं।

बांस के जंगलों में अत्यधिक घनत्व को कम करने और वन क्षेत्रों के विकास से जुड़े विशेष कार्य भी इस अभियान में शामिल हैं। अनुसूचित जाति और जनजातीय क्षेत्रों के लिए संचालित विशेष उप-योजनाओं के तहत जंगलों की सुरक्षा और रखरखाव के लिए भी राशि उपलब्ध कराई गई है।

इको-टूरिज्म को मिलेगा नया विस्तार

झारखंड में जंगलों और प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में भी कई परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं। जमशेदपुर वन प्रमंडल में राखामाईन्स, हरिणा और जादुगोड़ा के रंकिणी मंदिर क्षेत्र में इको कॉटेज और ट्री हाउस विकसित किए जा रहे हैं।

वहीं, घाटशिला के बुरूडीह डैम और जुबली डैम क्षेत्र में ‘वन-श्री इको कॉटेज’ का निर्माण किया जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य पर्यटकों को प्रकृति के करीब अनुभव उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

कई जिलों में बनेंगे नए पार्क

राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नए इको-टूरिज्म और जैव विविधता केंद्रों के विकास के लिए भी वित्तीय मंजूरी दी गई है।

  • गढ़वा: अन्नराज इको-टूरिज्म विकास
  • हजारीबाग: तिलैया जलाशय के किनारे पार्क
  • गिरिडीह: सिरसिया नगर वन
  • सरायकेला: मां आकर्षिणी जैव विविधता पार्क
  • पाकुड़: तिलका माझी नेचर पार्क
  • गुमला: आंजनधाम इको पार्क

इन परियोजनाओं के जरिए प्राकृतिक स्थलों के संरक्षण के साथ पर्यटन की संभावनाओं को भी विकसित करने की कोशिश की जा रही है। आंजनधाम और तिलका माझी नेचर पार्क जैसी परियोजनाएं धार्मिक एवं प्रकृति पर्यटन को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

हाथी और बाघ संरक्षण योजनाओं पर भी फोकस

वन्यजीव संरक्षण के मोर्चे पर भी विभाग ने वित्तीय प्रावधान किए हैं। व्याघ्र एवं हाथी परियोजनाओं के तहत वन्यजीव आश्रय क्षेत्रों के विकास और पिछले वित्तीय वर्ष से संबंधित लंबित दायित्वों के भुगतान के लिए राशि उपलब्ध कराई गई है।

इसके साथ ही राज्य के प्रमुख वन्यप्राणी आश्रय क्षेत्रों के समेकित विकास और रखरखाव के लिए भी वित्तीय संसाधन दिए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य संरक्षित क्षेत्रों की व्यवस्थाओं को मजबूत करना और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक पर्यावास तैयार करना है।

75+ उप-आवंटन से एक साथ कई मोर्चों पर काम

वित्तीय वर्ष 2026-27 में जारी किए गए इन उप-आवंटनों से झारखंड में वन विभाग की गतिविधियां कई स्तरों पर आगे बढ़ रही हैं। एक तरफ निजी और सरकारी भूमि पर हरियाली बढ़ाने की पहल है, तो दूसरी ओर जंगलों के वैज्ञानिक प्रबंधन, नदी तट संरक्षण, शहरी वानिकी और वन्यजीव सुरक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी के साथ इको-टूरिज्म से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाकर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।

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