Wednesday, October 7, 2026
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आदिवासी इलाकों के स्कूलों की बदहाली पर CJP का सवाल, टीम ने राजस्थान में किया जमीनी निरीक्षण

by उर्वशी शेखर
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राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षा से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को लेकर चिंता जताई गई है। इसी मुद्दे को लेकर सीजेपी की एक टीम ने शनिवार को खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों का दौरा किया। टीम में सीजेपी की सहसंयोजक आशुतोष रांका भी शामिल थे। यह दौरा संगठन के ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत किया गया।

टीम ने नया गांव तहसील के डेमाट, पोंगली और बाबरी गांवों में स्थित सरकारी विद्यालयों का जायजा लिया। दौरे के बाद सीजेपी की ओर से दावा किया गया कि कई स्कूलों में शिक्षा के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं तक पर्याप्त नहीं हैं। कुछ स्थानों पर विद्यालय के लिए जमीन उपलब्ध होने के बावजूद भवन का निर्माण नहीं होने की बात भी सामने रखी गई।

एक शिक्षक के भरोसे 70 बच्चों की पढ़ाई का दावा

आशुतोष रांका ने डेमाट स्थित राजकीय प्राथमिक आदिवासी विद्यालय का उदाहरण देते हुए स्कूल की स्थिति पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, विद्यालय में लंबे समय से नियमित पढ़ाई प्रभावित है और परिसर की हालत भी खराब है। उन्होंने दावा किया कि करीब 70 विद्यार्थियों के लिए केवल एक शिक्षक उपलब्ध है, जबकि स्कूल में मौजूद दो कक्षों की स्थिति भी जर्जर है।

रांका के मुताबिक, विद्यालय में पेयजल समेत कई जरूरी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल भवन की खराब स्थिति के बावजूद बच्चों की शिक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं।

स्थानीय लोगों ने खुद संसाधन जुटाने की बात कही

दौरे के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने भी शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। ग्रामीणों के मुताबिक, सरकारी स्तर पर पर्याप्त मदद नहीं मिलने के कारण वे स्कूल की जरूरतों को पूरा करने के लिए आपस में राशि जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए निर्धारित बजट के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब आदिवासी कल्याण और बच्चों की शिक्षा के लिए बड़ी राशि निर्धारित की जाती है, तो उसका प्रभाव जमीन पर क्यों दिखाई नहीं देता।

स्थानीय लोगों ने शिक्षा, भवन, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी को आदिवासी क्षेत्रों के विकास से जुड़ा गंभीर विषय बताया।

देश के कई राज्यों में स्कूलों के निरीक्षण का दावा

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 16 सितंबर को ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के अगले चरण की शुरुआत की थी। संगठन की ओर से कहा गया था कि अभियान के तहत उसकी टीमें महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड, गुजरात और ओडिशा समेत देश के विभिन्न आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों की स्थिति का जायजा लेंगी।

दीपके ने महाराष्ट्र में आदिवासी विद्यार्थियों की मौतों को लेकर भी चिंता व्यक्त की थी। उनके दावे के मुताबिक, पिछले दो वर्षों के दौरान महाराष्ट्र में 590 से अधिक छात्रों की मौत हुई है। उन्होंने आरोप लगाया था कि आदिवासी बच्चों के कल्याण और उनकी शिक्षा को लेकर सरकार की ओर से पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। ये आरोप संगठन और उसके पदाधिकारियों की ओर से लगाए गए हैं।

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