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झारखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। निर्वाचन विभाग को अब तक फॉर्म-7 के जरिए 4,609 दावे-आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। वहीं, मतदाता सूची में नए नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 के तहत 4,39,191 आवेदन मिल चुके हैं। इससे संकेत मिलता है कि पुनरीक्षण के दौरान एक ओर संदिग्ध या अपात्र प्रविष्टियों पर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी ओर बड़ी संख्या में पात्र नागरिक सूची में अपना नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया में हैं।
निर्वाचन विभाग के मुताबिक, फॉर्म-7 के जरिए मिली आपत्तियों में मतदाता की मृत्यु, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर चले जाना, एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में नाम दर्ज होना, निर्धारित आयु सीमा पूरी न करना और भारतीय नागरिकता नहीं होने जैसे कारण बताए गए हैं। हालांकि, केवल आपत्ति दर्ज होने के आधार पर किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। प्रत्येक मामले की निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाएगा।
नए मतदाताओं के पंजीकरण में भी तेजी
SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए बड़ी संख्या में आवेदन सामने आए हैं। फॉर्म-6 के तहत कुल 4,39,191 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें 11 सितंबर को ही 15,010 आवेदन दाखिल किए गए। यह फॉर्म उन भारतीय नागरिकों के लिए है, जो पात्र होने के बावजूद अभी मतदाता सूची में पंजीकृत नहीं हैं।
खास तौर पर 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं के लिए यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। पात्र युवा फॉर्म-6 के माध्यम से अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने का अनुरोध कर सकते हैं। इस तरह SIR के दौरान मतदाता सूची को एक तरफ अपडेट करने और दूसरी तरफ नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने का काम समानांतर रूप से चल रहा है।

विदेश में रह रहे भारतीयों ने भी किया आवेदन
झारखंड की मतदाता सूची में ओवरसीज इंडियन इलेक्टर के तौर पर पंजीकरण के लिए भी आवेदन आए हैं। अब तक फॉर्म-6A के जरिए 79 आवेदन प्राप्त हुए हैं। विदेश में रहने वाले पात्र भारतीय नागरिक इसी माध्यम से मतदाता पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। इन आवेदनों की भी निर्वाचन नियमों के मुताबिक जांच की जाएगी।
नोटिस मिलना नाम कटने का संकेत नहीं : CEO
झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने मतदाताओं के बीच बनी किसी भी तरह की आशंका को दूर करते हुए कहा है कि SIR के दौरान नोटिस जारी होना अपने आप में नाम हटाए जाने का आधार नहीं है। जिन लोगों को नोटिस मिला है, उनके मामलों पर नियमानुसार सुनवाई और जांच के बाद ही फैसला लिया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची से बाहर करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और अद्यतन बनाना है। आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत किसी योग्य नागरिक का नाम नहीं हटाया जाएगा और किसी अपात्र व्यक्ति को सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।
15 सितंबर के बाद शुरू होगी जांच की प्रक्रिया
SIR के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 15 सितंबर 2026 निर्धारित है। समयसीमा समाप्त होने के बाद निर्वाचन अधिकारियों द्वारा प्राप्त सभी आवेदनों की जांच की जाएगी। जिन मामलों में जरूरत होगी, वहां संबंधित मतदाताओं को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद दस्तावेजों और पात्रता के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 19 अक्टूबर 2026 को झारखंड की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। ऐसे में मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे पुनरीक्षण के दौरान अपने नाम और अन्य विवरणों की स्थिति जांचते रहें। यदि किसी प्रविष्टि में सुधार, नाम जोड़ने या हटाने को लेकर कोई वैध दावा या आपत्ति है, तो उसे तय समयसीमा के भीतर संबंधित प्रक्रिया के माध्यम से दर्ज कराना होगा।