झारखंड में नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले पर सुनवाई की, लेकिन कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी। अब इस मामले को 16 सितंबर को विस्तार से सुना जाएगा।
मामला झारखंड में DGP की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर दायर कई याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि राज्य में DGP की नियुक्ति प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं की गई है। इसी मुद्दे को लेकर शीर्ष अदालत में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं।
न्याय मित्र की रिपोर्ट भी बनी सुनवाई का अहम हिस्सा
मामले की सुनवाई में अदालत की सहायता के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पहले संबंधित दस्तावेज न्याय मित्र (Amicus Curiae) को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। न्याय मित्र ने मामले की समीक्षा के बाद अपनी रिपोर्ट शीर्ष अदालत में दाखिल कर दी।

पिछली सुनवाई के दौरान झारखंड सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत से न्याय मित्र की रिपोर्ट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंप दी गई थी।
16 सितंबर को होगी आगे की सुनवाई
रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद मामले की सुनवाई के लिए 7 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई थी। सोमवार को पीठ के समक्ष सुनवाई हुई, लेकिन मामले में विस्तृत बहस पूरी नहीं हो सकी। अब अदालत 16 सितंबर को इस महत्वपूर्ण मामले पर आगे सुनवाई करेगी।
नियमित DGP की नियुक्ति से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसमें राज्य में पुलिस प्रमुख की नियुक्ति की प्रक्रिया और उस पर लागू सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाए गए हैं।