Wednesday, October 7, 2026
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नेतरहाट विद्यालय में प्राचार्य पद को लेकर मचा घमासान, पढ़ाई से ज्यादा बढ़ी प्रबंधन की खींचतान

by उर्वशी शेखर
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झारखंड का प्रतिष्ठित नेतरहाट विद्यालय, जिसने देश को बड़ी संख्या में IAS और IPS अधिकारी दिए हैं, इन दिनों शैक्षणिक गतिविधियों के बजाय प्रशासनिक विवाद को लेकर चर्चा में है। प्राचार्य पद को लेकर चल रही खींचतान का असर विद्यालय के माहौल पर पड़ने लगा है। पढ़ाई और परीक्षाओं से जुड़ी गतिविधियां प्रभावित होने से छात्र परेशान हैं, वहीं अभिभावक भी मौजूदा स्थिति को लेकर चिंतित हैं।

विद्यालय की प्रबंधन व्यवस्था को लेकर पहले से चल रहे विवाद के बीच न्यायालय के हस्तक्षेप के बावजूद स्थिति सामान्य होती नजर नहीं आ रही है। प्राचार्य पद को लेकर दो अलग-अलग दावों के कारण विद्यालय में टकराव और गुटबाजी की स्थिति बनी हुई है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुआ नया अध्याय

नेतरहाट विद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में WPC 4052/2025 के तहत जनहित याचिका दायर की गई है। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने 16 अप्रैल 2026 को विद्यालय के पूर्व छात्र और सेवानिवृत्त IAS अधिकारी राजकुमार को नेतरहाट विद्यालय समिति की तदर्थ कार्यकारिणी समिति का सभापति नियुक्त करने का आदेश दिया।

अदालत के निर्देश के बाद राजकुमार ने 18 अप्रैल 2026 को सभापति का पद संभाला। इसके बाद उन्होंने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए विद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग के अध्यक्ष रवि रंजन को प्रभारी प्राचार्य नियुक्त करने का आदेश जारी किया।

रवि रंजन ने 14 अगस्त को प्रभारी प्राचार्य के तौर पर कार्यभार संभालने का दावा किया है। उनका कहना है कि पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने इसकी जानकारी समिति के सभापति को भी भेज दी थी।

एक पद, दो दावों से बढ़ा विवाद

स्थिति इसलिए पेचीदा हो गई है क्योंकि विद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य पद छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। उन पर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े कई आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में एक तरफ रवि रंजन खुद को हाईकोर्ट के आदेश के बाद नियुक्त प्रभारी प्राचार्य बता रहे हैं, जबकि दूसरी ओर पूर्व प्राचार्य के पद पर बने रहने से प्रशासनिक टकराव की स्थिति पैदा हो गई है।

रवि रंजन के मुताबिक, उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रभार तो ले लिया है, लेकिन विद्यालय का कार्यालय और उससे जुड़े कामकाज अब तक उनके नियंत्रण में नहीं आए हैं। इससे विद्यालय के प्रशासनिक कामकाज को लेकर भी असमंजस बना हुआ है।

छात्रों और अभिभावकों की बढ़ी चिंता

प्राचार्य पद को लेकर जारी विवाद का असर अब विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण पर पड़ने की चिंता जताई जा रही है। जिस संस्थान में दूर-दराज से छात्र बेहतर शिक्षा और अनुशासन के माहौल में पढ़ने आते हैं, वहां लगातार जारी प्रशासनिक खींचतान उनके लिए परेशानी का कारण बन रही है।

परीक्षाओं और नियमित शैक्षणिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ने की बात सामने आ रही है। वहीं, विद्यालय परिसर में टकराव की स्थिति बनने से कानून-व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

न्यायालय के हस्तक्षेप के बावजूद यदि प्रबंधन का विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो इसका असर विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था और उसकी प्रतिष्ठा दोनों पर पड़ने की आशंका है।

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