Tuesday, October 6, 2026
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पर्यावरण संरक्षण में सबकी भागीदारी जरूरी! IIT-ISM में राज्यपाल गंगवार ने दिया सामूहिक प्रयास पर जोर

by उर्वशी शेखर
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धनबाद स्थित आईआईटी (आईएसएम) में रविवार को आयोजित राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर सामूहिक जिम्मेदारी की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं का समाधान केवल सरकारी योजनाओं और प्रयासों के भरोसे नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज के विभिन्न वर्गों को मिलकर काम करना होगा।

राज्यपाल ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान, वैज्ञानिक समुदाय, चिकित्सक, उद्योग जगत और आम लोग अपनी-अपनी भूमिका निभाकर पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने जल और बिजली की बचत जैसे रोजमर्रा के छोटे कदमों को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, जिम्मेदार उपभोग और जीवनशैली के जरिए प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सकता है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण का गहरा संबंध

कार्यशाला में राज्यपाल ने पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के बीच संबंध पर भी चर्चा की। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए कहा कि दोनों क्षेत्रों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।

योग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसका लाभ केवल शरीर तक सीमित नहीं है। नियमित योग मानसिक संतुलन बनाए रखने और व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था में बीमारी के इलाज के साथ-साथ रोकथाम, पोषण, योग और स्वच्छ पर्यावरण को भी प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।

समग्र स्वास्थ्य के लिए समन्वित दृष्टिकोण

संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों और उपलब्ध दृष्टिकोणों के बीच समन्वय स्थापित कर व्यापक स्वास्थ्य मॉडल विकसित किया जा सकता है। इस दिशा में उन्होंने आरोग्य भारती जैसी संस्थाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

तकनीकी संस्थान करें शोध और नवाचार

राज्यपाल ने आईआईटी (आईएसएम) जैसे तकनीकी संस्थानों से पर्यावरणीय चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने संस्थान के शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों से जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, कचरा प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि तकनीकी ज्ञान और वैज्ञानिक अनुसंधान का इस्तेमाल पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान तैयार करने में किया जाना चाहिए।

युवाओं से बदलाव की पहल करने की अपील

कार्यशाला के दौरान राज्यपाल ने विद्यार्थियों और युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए इसे केवल अभियान तक सीमित न रखने की बात कही। उन्होंने युवाओं से अपने दैनिक व्यवहार में पर्यावरण-अनुकूल आदतें अपनाने और अपने आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

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