रामगढ़ के प्रसिद्ध रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर के पुनर्विकास और दुकानदारों के विस्थापन से जुड़े अवमानना मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पर्यटन सचिव मुकेश कुमार और रामगढ़ के उपायुक्त को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था, जिसके तहत दोनों अधिकारी अदालत में पेश हुए।
सुनवाई में पर्यटन सचिव की ओर से बताया गया कि मंदिर परिसर के विकास कार्य के लिए अतिरिक्त राशि की जरूरत है। इस संबंध में संबंधित मंत्री के माध्यम से सरकार के समक्ष प्रस्ताव भेजा जा चुका है। हालांकि, अदालत के समक्ष यह भी स्पष्ट हुआ कि विकास योजना के लिए बजट का मद अभी अंतिम रूप से निर्धारित नहीं हुआ है। इसके बावजूद परिसर से स्थानीय दुकानदारों को हटाए जाने का मामला सामने आया।
अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मामले में अपना पूरा पक्ष शपथपत्र के जरिए प्रस्तुत करें।

दुकानदारों ने पुलिस पर परेशान करने का लगाया आरोप
सुनवाई के दौरान विस्थापित दुकानदारों की ओर से अधिवक्ता पिंकी साव और राधा कृष्ण गुप्ता ने उनकी परेशानियों को कोर्ट के सामने रखा। उन्होंने बताया कि कुछ दुकानदारों को वैकल्पिक दुकानें उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन सभी प्रभावित लोगों की समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
अधिवक्ताओं के मुताबिक, कई गरीब दुकानदार छोटे स्तर पर अस्थायी दुकान लगाकर परिवार का गुजारा कर रहे हैं। आरोप है कि पुलिस-प्रशासन उन्हें वहां से हटा देता है और दुकान लगाने पर परेशान किया जाता है। इससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
दुकानदारों की ओर से अदालत से मांग की गई कि जब तक विकास योजना के लिए धनराशि स्वीकृत नहीं होती और उनके लिए स्थायी व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक उन्हें अस्थायी रूप से दुकान लगाने की अनुमति दी जाए।
खंडपीठ ने दुकानदारों की ओर से रखे गए तथ्यों और मांगों को भी विस्तृत शपथपत्र के माध्यम से रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया है।