Thursday, October 8, 2026
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JSSC-CGL धांधली में नया खुलासा! अभय तिवारी के भाई ने भी लिया ‘सेटिंग सिंडिकेट’ का फायदा

by उर्वशी शेखर
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झारखंड में वर्ष 2024 में आयोजित JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं की जांच कर रही CID को मामले में एक और महत्वपूर्ण कड़ी हाथ लगी है। जांच एजेंसी की ओर से अदालत में प्रस्तुत Memo of Evidence में अभय तिवारी के भाई अक्षय तिवारी की भूमिका को लेकर गंभीर तथ्य दर्ज किए गए हैं।

CID की जांच के अनुसार, अक्षय तिवारी ने केवल CGL-2023 ही नहीं, बल्कि 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में भी कथित तौर पर अपने भाई अभय कुमार तिवारी से जुड़े सेटिंग नेटवर्क का लाभ उठाया था। जांच एजेंसी का दावा है कि दोनों परीक्षाओं में उसकी सफलता सामान्य प्रक्रिया के बजाय कथित तौर पर संगठित व्यवस्था के जरिए हासिल की गई।

परीक्षा से एक दिन पहले बोकारो पहुंचने का दावा

जांच में अक्षय तिवारी की परीक्षा से पहले की गतिविधियों को भी महत्वपूर्ण माना गया है। रिकॉर्ड के मुताबिक, 22 सितंबर 2024 को गिरिडीह में उसका परीक्षा केंद्र निर्धारित था। इससे एक दिन पहले, 21 सितंबर को वह अपने गांव से मधुपुर होते हुए बोकारो के दुग्धा स्थित BCCL कॉलोनी पहुंचा था।

CID के मुताबिक, इसी ठिकाने पर अभ्यर्थियों को कथित तौर पर एकत्र कर लीक हुए प्रश्नपत्र के उत्तर उपलब्ध कराए जा रहे थे और उन्हें याद कराया जा रहा था। जांच एजेंसी का कहना है कि पूछताछ के दौरान अक्षय ने भी 21 सितंबर को उस स्थान पर जाने की बात स्वीकार की।

CDR और लोकेशन से आवाजाही की पुष्टि का दावा

जांच एजेंसी ने अक्षय के मोबाइल फोन से जुड़े कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा का भी विश्लेषण किया। CID के अनुसार, इन तकनीकी साक्ष्यों से उसके 21 सितंबर की रात बोकारो से गिरिडीह की ओर जाने की जानकारी सामने आई।

जांच में इस यात्रा को परीक्षा से पहले बोकारो में कथित रूप से चल रहे प्रश्नपत्र-उत्तर नेटवर्क से जोड़कर देखा गया है। एजेंसी का दावा है कि उपलब्ध साक्ष्यों से अक्षय की भूमिका महज एक आरोपी के रिश्तेदार तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह कथित परीक्षा धांधली से लाभान्वित होने वाले लोगों में शामिल था।

बयानों के मिलान से भूमिका सामने आने का दावा

अक्षय तिवारी मुख्य आरोपी बताए जा रहे मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी का भाई है। CID ने अदालत में पेश दस्तावेजों में कहा है कि मुख्य आरोपी और अन्य आरोपियों से पूछताछ के दौरान सामने आए बयानों को अक्षय से जुड़े तथ्यों के साथ मिलाने पर उसकी कथित भूमिका स्पष्ट होती है।

एजेंसी के अनुसार, जांच में ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिनके आधार पर अक्षय पर परीक्षा प्रक्रिया में अनुचित तरीके से लाभ हासिल कर सरकारी नौकरी की चयन सूची में स्थान बनाने का आरोप है। मामले में CID अब सामने आए साक्ष्यों, आरोपियों के बयानों और तकनीकी रिकॉर्ड के आधार पर पूरे कथित सिंडिकेट की भूमिका की जांच आगे बढ़ा रही है।

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