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गढ़वा के नगर उंटारी में झामुमो के धरना-प्रदर्शन से जुड़ा एक कथित वीडियो सामने आने के बाद झारखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है। वीडियो में झामुमो विधायक अनंत प्रताप देव की ओर से प्रखंड के बीडीओ और सीओ को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक चेतावनी दिए जाने का दावा किया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस की पूर्व विधायक अम्बा प्रसाद ने झामुमो के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के आचरण पर सवाल खड़े किए हैं।
अम्बा प्रसाद ने कहा कि किसी भी राजनीतिक संगठन की पहचान केवल उसके नारों से नहीं, बल्कि उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक व्यवहार से भी होती है। उन्होंने वायरल वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि झामुमो के जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं की भाषा तथा आचरण को देखकर जनता स्वयं तय कर सकती है कि उनके दावों और व्यवहार में कितना अंतर है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि झारखंड में जल, जंगल और जमीन की राजनीति करने वाली सरकार के प्रतिनिधियों के व्यवहार पर भी चर्चा होनी चाहिए। उनके अनुसार, आम लोगों से जुड़े बुनियादी सवालों के बीच राजनीतिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों की भाषा में कथित आक्रामकता लोकतांत्रिक संवाद के लिए गंभीर विषय है।
कांग्रेस और झामुमो के अनुशासन पर सवाल
कांग्रेस नेता ने दोनों दलों के भीतर अनुशासन के मुद्दे को लेकर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि यदि कांग्रेस के किसी मंत्री या नेता की ओर से अधिकारियों के प्रति इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जाता, तो पार्टी के भीतर तत्काल कार्रवाई की मांग उठती। उन्होंने आरोप लगाया कि झामुमो से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के मामले में अनुशासन को लेकर अलग-अलग मानदंड दिखाई देते हैं।
अम्बा प्रसाद ने वायरल वीडियो में कथित भाषा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इसके आधार पर जनता को स्वयं तय करना चाहिए कि संबंधित व्यवहार को किस रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने किसी एक विशेष शब्द का इस्तेमाल करने के बजाय फैसला जनता पर छोड़ने की बात कही।

अधिकारियों की भूमिका पर भी कटाक्ष
मामले में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी अम्बा प्रसाद ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने सवाल उठाया कि अधिकारियों तक ऐसे वीडियो और राजनीतिक बयानों की जानकारी पहुंचने के बावजूद उनकी प्रतिक्रिया क्या होती है।
उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि कुछ अधिकारियों को अपनी ‘रीढ़’ की मजबूती जांचने की जरूरत है। उनके इस बयान का निशाना प्रशासन पर कथित राजनीतिक दबाव और अधिकारियों के रवैये की ओर था। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी जनता के प्रति होती है, न कि किसी राजनीतिक प्रभावशाली व्यक्ति के प्रति।
उन्होंने चिकित्सा-विज्ञान का संदर्भ देते हुए भी अधिकारियों पर तंज कसा और कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखाई देता है। हालांकि, उनके बयान का मूल केंद्र अधिकारियों पर कथित राजनीतिक दबाव और उनकी स्वतंत्र कार्यप्रणाली का सवाल रहा।
19 सितंबर के प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
यह विवाद 19 सितंबर को नगर उंटारी प्रखंड मुख्यालय में हुए झामुमो के धरना-प्रदर्शन से जुड़ा है। इसी कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें विधायक अनंत प्रताप देव की ओर से बीडीओ और सीओ को लेकर कथित चेतावनी दिए जाने की बात कही जा रही है।
वीडियो सामने आने के बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। एक तरफ जनप्रतिनिधि और प्रशासन के बीच अधिकारों एवं कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक मंचों से अधिकारियों के प्रति इस्तेमाल की जाने वाली भाषा और राजनीतिक दलों के आंतरिक अनुशासन पर भी चर्चा शुरू हो गई है।