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“Voter Registration and Voter Registers 2026” अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के बाद बुधवार को मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार-विमर्श किया। सम्मेलन के तहत आयोजित पैनल चर्चा और छह तकनीकी सत्रों में लोकतांत्रिक भागीदारी, निर्वाचन समावेशन, प्रवासन, लैंगिक भागीदारी, तकनीक और दुनिया के अलग-अलग देशों की पंजीकरण व्यवस्थाओं जैसे विषय प्रमुख रहे।
पैनल चर्चा में जागरूकता से लेकर प्रवासन तक पर विमर्श
“Voter Registration and Voter Register” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा की अध्यक्षता बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक डी.एन. गौतम ने की, जबकि प्रो. संदीप शास्त्री सह-अध्यक्ष रहे। चर्चा में मतदाता जागरूकता को बढ़ाने, चुनावी प्रक्रिया को अधिक समावेशी और सुगम बनाने तथा EPIC और मतदाता सूची के बीच एकरूपता सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
इसके साथ ही महिलाओं की चुनावी भागीदारी, आंतरिक प्रवासन, सार्वजनिक जवाबदेही और विभिन्न देशों में अपनाई जा रही मतदाता पंजीकरण प्रणालियों पर भी चर्चा हुई। वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही बेहतर व्यवस्थाओं से भारत के लिए उपयोगी पहलुओं पर भी विचार किया गया।
छह तकनीकी सत्रों में अलग-अलग विषयों पर शोध
पहले तकनीकी सत्र का केंद्र “Voter Registration and Voter Register: Strengthening Democracy” रहा। प्रो. सुधीर कुमार सिंह की अध्यक्षता और डॉ. प्रतिमा सारंगी की सह-अध्यक्षता में हुए इस सत्र में नागरिकता, मतदाता पंजीकरण, राजनीतिक दलों की भूमिका और लोकतंत्र को मजबूत करने से जुड़े शोध प्रस्तुत किए गए।
दूसरे सत्र में “Voter Registration: Cross Country Experience Across Globe” के तहत अलग-अलग देशों के अनुभवों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया। डॉ. महेश देबता की अध्यक्षता और डॉ. बी.बी. बिस्वास की सह-अध्यक्षता वाले इस सत्र में एस्टोनिया, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, डेनमार्क, घाना और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों की व्यवस्थाओं पर शोध पत्र प्रस्तुत हुए।
तीसरे सत्र में “Voter Registration: Theoretical Paradigm” के जरिए मतदाता पंजीकरण के सैद्धांतिक पक्षों पर चर्चा हुई। चैतन्य प्रसाद की अध्यक्षता और प्रो. दिवांशु श्रीवास्तव की सह-अध्यक्षता में निर्वाचन समावेशन, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और मतदाता सूची प्रबंधन के वैचारिक पहलुओं पर विमर्श किया गया।
सोशल मीडिया और AI के इस्तेमाल पर भी चर्चा
चौथे तकनीकी सत्र का विषय “Voter Registration and Voter Register: Social Media and Imperative of Awareness” था। शिव प्रसाद शर्मा की अध्यक्षता और प्रो. संजय कुमार की सह-अध्यक्षता में हुए इस सत्र में सोशल मीडिया के माध्यम से मतदाता जागरूकता, बहुभाषी निर्वाचन साक्षरता और मतदाता पंजीकरण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संभावित उपयोग पर शोध प्रस्तुत किए गए।
पांचवें सत्र में एक बार फिर विभिन्न लोकतांत्रिक देशों की पंजीकरण व्यवस्थाओं को तुलनात्मक नजरिए से देखा गया। डॉ. आनंदकुमार आर. शिंदे की अध्यक्षता और डॉ. अरुण राय की सह-अध्यक्षता में हुए इस सत्र में भारत समेत दूसरे देशों के मॉडल, ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण और आधुनिक तकनीकी साधनों के इस्तेमाल पर चर्चा हुई।

छठे सत्र में “Voter Registration and Voter Register: Gender and Migrant Issues” विषय के तहत निर्वाचन प्रक्रिया में उन वर्गों की चुनौतियों पर फोकस किया गया, जिनकी भागीदारी अक्सर विभिन्न सामाजिक और भौगोलिक कारणों से प्रभावित होती है। डॉ. चार्वाक पति की अध्यक्षता और डॉ. हनी राज की सह-अध्यक्षता में ग्रामीण एवं वंचित समुदायों, प्रवासी श्रमिकों, जनजातीय आबादी और सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के पंजीकरण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
तीन लेक्चर थिएटर में समानांतर सत्र
सम्मेलन के समानांतर तकनीकी सत्रों के लिए NUSRL के तीन कक्षों और लेक्चर थिएटरों को तैयार किया गया था। नॉलेज पार्टनर संस्थानों के शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के साथ छात्र स्वयंसेवकों ने भी आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने अकादमिक सत्रों में भाग लेने के अलावा सम्मेलन की व्यवस्थाओं और संचालन में भी सहयोग किया।
देशभर के विशेषज्ञों को जोड़ा गया सम्मेलन से
सम्मेलन की मुख्य थीम को ध्यान में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और पूर्व प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। इन विशेषज्ञों ने तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता, शोध प्रस्तुतियों और विषयगत विमर्श में योगदान दिया।
आमंत्रित विशेषज्ञों में डी.एन. गौतम, डॉ. प्रतिमा सारंगी, डॉ. वी. विजयकुमार, डॉ. महेश देबता, प्रो. सतीश कुमार सिंह, प्रो. सुरेंद्र कुमार, प्रो. सुधीर कुमार सिंह, प्रो. ईशान नस्कर, चैतन्य प्रसाद, डॉ. राहुल वर्मा, प्रो. रेखा सक्सेना, प्रो. संदीप शास्त्री, प्रो. ए.के. वर्मा, डॉ. स्वपन के. बिस्वास, शिव प्रसाद शर्मा, एस.के. सेठिया और डॉ. हरि चरण बेहारा शामिल रहे।
सम्मेलन में निर्वाचन विभाग के अधिकारी, राष्ट्रीय स्तर के मास्टर ट्रेनर, शिक्षाविद, शोधकर्ता और विद्यार्थी भी मौजूद रहे। इनमें अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, राज्य प्रशिक्षण नोडल पदाधिकारी देव दास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी डॉ. धीरज कुमार ठाकुर, अवर निर्वाचन पदाधिकारी सुनील कुमार सिंह, प्रो. आलोक कुमार गुप्ता, डॉ. अपर्णा, डॉ. चार्वाक पति, डॉ. आनंदकुमार आर. शिंदे, डॉ. बी.के. सिन्हा और डॉ. आशुतोष कुमार पांडेय समेत अन्य अधिकारी एवं प्रतिभागी शामिल रहे।
सम्मेलन में हुई चर्चाओं का व्यापक फोकस यही रहा कि बदलती सामाजिक परिस्थितियों, बढ़ते प्रवासन और तेजी से विकसित होती तकनीक के बीच मतदाता पंजीकरण की व्यवस्था को किस तरह अधिक सटीक, समावेशी, पारदर्शी और नागरिकों के लिए सुगम बनाया जा सकता है।