Tuesday, October 6, 2026
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पोल-मीटर लगे, तार भी खिंचे… फिर भी अंधेरे में रेका गांव, एक साल से बिजली के इंतजार में ग्रामीण

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विकास की बुनियादी जरूरतों में शामिल बिजली सुविधा से लातेहार सदर प्रखंड के पेशरार पंचायत का रेका गांव अब भी वंचित है। करीब दो साल पहले गांव में विद्युत व्यवस्था खड़ी की गई थी। बिजली के पोल लगाए गए, तार बिछाए गए और घरों पर मीटर भी लगाए गए। शुरुआत में आपूर्ति मिली, लेकिन कुछ समय बाद बिजली की स्थिति बिगड़ती चली गई। करीब एक वर्ष से गांव में बिजली पूरी तरह बंद है।

रेका में लगभग 100 परिवार रहते हैं और कुल आबादी करीब 600 है। गांव में आदिवासी, दलित और आदिम जनजाति समुदाय के लोग भी निवास करते हैं। बिजली की अनुपलब्धता का असर यहां की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देता है। सूर्यास्त के बाद गांव में अंधेरा छा जाता है और लोगों को जरूरी कामों के लिए वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है।

पढ़ाई से लेकर घरेलू काम तक प्रभावित

बिजली नहीं होने का सबसे गंभीर असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। शाम के बाद पढ़ाई करने में उन्हें परेशानी होती है। मोबाइल फोन चार्ज करने, घरेलू उपकरण चलाने और दूसरे जरूरी कामों के लिए भी ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने से गांव में असुविधा के साथ सुरक्षा की चिंता भी बनी रहती है।

व्यवस्था तैयार, फिर भी घरों में नहीं पहुंच रही बिजली

रेका की स्थिति इसलिए भी सवाल खड़े करती है क्योंकि यहां बिजली पहुंचाने का आधारभूत ढांचा पहले से मौजूद है। कई घरों के बाहर मीटर लगे हुए हैं। बिजली के खंभे और तार भी दिखाई देते हैं। इसके बावजूद इन संसाधनों का ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल रहा है।

ग्रामीणों के मुताबिक शुरुआती दौर में बिजली की आपूर्ति नियमित नहीं थी। कुछ समय तक बिजली आती-जाती रही, लेकिन बाद में आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई। इसके बाद से गांव में सामान्य विद्युत व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी है।

शिकायत के बाद भी समाधान का इंतजार

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली संकट की जानकारी संबंधित स्तर पर कई बार दी जा चुकी है। आपूर्ति बहाल करने की मांग भी की गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण अब चाहते हैं कि विभाग मौके पर पहुंचकर विद्युत लाइन, उपकरण और अन्य तकनीकी व्यवस्था की जांच करे, ताकि खराबी की वास्तविक वजह सामने आ सके।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि लाइन या किसी उपकरण में खराबी है तो उसकी मरम्मत कर जल्द बिजली चालू की जानी चाहिए। उनका कहना है कि उन्हें किसी अतिरिक्त सुविधा की मांग नहीं है, बल्कि पहले से उपलब्ध कनेक्शन के जरिए नियमित बिजली मिलने की अपेक्षा है।

सरकारी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

रेका की स्थिति यह सवाल खड़ा कर रही है कि जब गांव में बिजली पहुंचाने के लिए जरूरी ढांचा तैयार हो चुका है, तो आपूर्ति लंबे समय से बंद क्यों है। ग्रामीणों के लिए बिजली के खंभे और घरों पर लगे मीटर अब उस सुविधा की याद बनकर रह गए हैं, जिसका लाभ उन्हें लगातार नहीं मिल पा रहा है।

करीब एक साल से अंधेरे में रह रहे रेका के ग्रामीण अब प्रशासन और बिजली विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं। उनकी मांग है कि खराबी की पहचान कर विद्युत व्यवस्था दुरुस्त की जाए और गांव में नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

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