झारखंड में शराब नीति को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर लगाए गए आरोपों पर अब प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने पलटवार किया है। झारखंड कांग्रेस के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने कहा कि किसी भी मामले में जांच पूरी होने से पहले राजनीतिक आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
आलोक दूबे ने कहा कि शराब नीति से जुड़े मामले की जांच अलग-अलग स्तर पर एसीबी, ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों द्वारा की जा रही है। ऐसे में जांच एजेंसियों को अपनी प्रक्रिया पूरी करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि जब विभिन्न जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं, तो वह आखिर किस एजेंसी की जांच पर भरोसा करती है। कांग्रेस नेता के मुताबिक जांच का निष्कर्ष सामने आने से पहले राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए।
‘आरोप हैं तो जांच एजेंसी या कोर्ट में दें सबूत’
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि यदि बाबूलाल मरांडी या भाजपा के पास भ्रष्टाचार और अनियमितता से जुड़े ठोस प्रमाण हैं, तो उन्हें संबंधित जांच एजेंसियों अथवा न्यायालय के सामने पेश किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल सोशल मीडिया पोस्ट या राजनीतिक बयानों के जरिए गंभीर आरोप लगाना किसी मामले को साबित नहीं करता। आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।

कांग्रेस महासचिव ने भाजपा के रुख पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जांच शुरू होने पर एजेंसियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जाते हैं, कार्रवाई होने पर राजनीतिक बदले की बात कही जाती है और कार्रवाई नहीं होने पर सरकार पर संरक्षण देने का आरोप लगाया जाता है। आलोक दूबे ने सवाल किया कि भाजपा का वास्तविक रुख आखिर क्या है और वह इस मामले में किस तरह की कार्रवाई चाहती है।
‘दोष साबित होने पर कानून के मुताबिक हो कार्रवाई’
आलोक दूबे ने कहा कि अगर जांच के दौरान किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप प्रमाणित होते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन जांच पूरी होने और अदालत के निर्णय से पहले किसी को दोषी घोषित करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों और न्यायपालिका को स्वतंत्र रूप से अपना काम करने देना चाहिए। राजनीतिक बयानबाजी से जांच अथवा न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि झारखंड की जनता शराब नीति विवाद में तथ्यों, प्रमाणों और निष्पक्ष जांच के आधार पर सच्चाई सामने आने की उम्मीद करती है। उन्होंने भाजपा से आरोपों के बजाय प्रमाण सामने रखने को कहा। आलोक दूबे के मुताबिक किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि जांच और कानूनी प्रक्रिया के परिणाम से तय होना चाहिए।