झारखंड कांग्रेस में अभिलाष साहू की संगठन में वापसी को लेकर एक बार फिर स्थिति बदल गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 14 सितंबर को उनकी प्राथमिक सदस्यता बहाल करने के साथ उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी थी, लेकिन तीन दिन बाद ही एआईसीसी के झारखंड प्रभारी के. राजू ने इस फैसले पर रोक लगाने का निर्देश जारी कर दिया।
के. राजू ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश को पत्र भेजकर कहा है कि साहू से संबंधित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जांच रिपोर्ट अभी लंबित है। ऐसे में रिपोर्ट की समीक्षा पूरी होने तक उन्हें कोई संगठनात्मक जिम्मेदारी देना उचित नहीं होगा।
पहले जांच, फिर संगठन में जिम्मेदारी
प्रभारी के पत्र के मुताबिक, अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े मामले में यह भी देखा जाना बाकी है कि साहू के कथित कृत्यों और उनके खिलाफ तय किए गए दंड के बीच उचित संतुलन था या नहीं। इसी कारण अंतिम निर्णय से पहले जांच रिपोर्ट का परीक्षण जरूरी बताया गया है।

एआईसीसी की ओर से प्रदेश अनुशासन समिति को मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। समिति से साहू की कथित वीडियो बनाने और उसे सार्वजनिक किए जाने में भूमिका, अनुशासन समिति के समक्ष दिए गए उनके स्पष्टीकरण तथा सार्वजनिक मंचों पर दिए गए बयानों की जांच करने को कहा गया है। उनके सार्वजनिक आचरण और पार्टी के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता से जुड़े तथ्यों को भी रिपोर्ट में शामिल करने का निर्देश है।
14 सितंबर को बहाली, 17 को रोक
प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर 14 सितंबर को जारी अधिसूचना के जरिए साहू की कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष पद पर बहाली की गई थी। इसके बाद 17 सितंबर को प्रदेश प्रभारी के पत्र ने इस बहाली से जुड़े संगठनात्मक दायित्व को फिलहाल रोक दिया।
अब अनुशासन समिति की रिपोर्ट आने और उसके परीक्षण के बाद ही साहू की संगठनात्मक भूमिका पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल उपाध्यक्ष के तौर पर उनकी जिम्मेदारी स्थगित रहेगी।
इस घटनाक्रम से झारखंड कांग्रेस में संगठनात्मक फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर चर्चा जरूर तेज हुई है। फिलहाल पार्टी के स्तर पर अगला कदम अनुशासन समिति की रिपोर्ट के बाद ही तय होने की बात सामने आई है।