Thursday, October 8, 2026
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झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम की वित्तीय सेहत पर सवाल, 168 करोड़ की देनदारी के बीच 48 लाख का शुद्ध घाटा

by उर्वशी शेखर
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झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड की ताजा वित्तीय तस्वीर कंपनी पर बढ़ते देनदारी के दबाव और लगातार हो रहे नकदी नुकसान की ओर इशारा करती है। निगम की बैलेंस शीट के मुताबिक, कंपनी की कुल संपत्ति 206.33 करोड़ रुपये है, जबकि कुल देनदारियां 168.14 करोड़ रुपये तक पहुंच गई हैं। पिछले वित्त वर्ष में यह देनदारी 127.86 करोड़ रुपये थी।

कंपनी की स्थायी संपत्तियों का मूल्य भी बेहद सीमित है। मौजूदा वित्त वर्ष में यह 6.16 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 5.31 करोड़ रुपये था। वहीं, ट्रेड रिसीवेबल्स 43.15 करोड़ रुपये और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियां 65.64 करोड़ रुपये हैं। इनमें करीब 40.50 करोड़ रुपये की संदिग्ध या विवादित वित्तीय परिसंपत्तियां भी शामिल हैं।

निगम के पास नकदी और नकदी समकक्ष की स्थिति पिछले साल की तुलना में बेहतर हुई है। इस मद में 29.28 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं, जबकि पिछले वर्ष यह राशि 16.39 करोड़ रुपये थी। कंपनी की कुल चालू परिसंपत्तियां 82.65 करोड़ रुपये दर्ज की गई हैं।

लोन और अन्य देनदारियों का बढ़ता दबाव

वित्तीय ढांचे में कंपनी की शेयर कैपिटल 40.13 करोड़ रुपये है, जो पिछले वर्ष के 38.03 करोड़ रुपये से अधिक है। हालांकि, रिजर्व और सरप्लस के तहत अन्य इक्विटी 10.27 करोड़ रुपये नकारात्मक है। इसके चलते निगम की कुल इक्विटी सिर्फ 29.86 करोड़ रुपये रह गई है।

कंपनी पर सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड लोन का बोझ भी बढ़ा है। सरकार तथा अन्य स्रोतों से लिए गए इन कर्जों की राशि 96.34 करोड़ रुपये हो गई है, जबकि पिछले साल यह 93.30 करोड़ रुपये थी। रिपोर्ट के अनुसार, इन देनदारियों के भुगतान में लंबे समय से विलंब बना हुआ है।

इसके अलावा अन्य गैर-चालू देनदारियां एक साल में 13.80 करोड़ से बढ़कर 35.77 करोड़ रुपये हो गई हैं। प्रोविजन के रूप में भी 36.03 करोड़ रुपये की देनदारी दर्ज है। इन सभी मदों को मिलाकर कंपनी की गैर-चालू देनदारियां 168.14 करोड़ रुपये तक पहुंच गई हैं।

आय से ज्यादा खर्च, फिर भी घाटे में निगम

समीक्षाधीन अवधि में निगम को अपने संचालन से 48.22 करोड़ रुपये की आय हुई, जबकि पिछले साल यह 23.76 करोड़ रुपये थी। अन्य स्रोतों से 1.13 करोड़ रुपये की आमदनी जोड़ने के बाद कंपनी की कुल आय 49.35 करोड़ रुपये रही।

इसके मुकाबले कुल खर्च 52.25 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसमें कर्मचारियों से जुड़े खर्च 17.56 करोड़ रुपये और अन्य प्रशासनिक एवं संबंधित खर्च 31.46 करोड़ रुपये रहे। आय और व्यय के बीच अंतर के चलते टैक्स से पहले निगम को 2.90 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।

हालांकि विभिन्न समायोजनों के बाद वित्त वर्ष का शुद्ध घाटा 48 लाख रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के 1.51 करोड़ रुपये के घाटे की तुलना में कम है। इसके बावजूद कंपनी का नकदी प्रवाह पूरी तरह घाटे से बाहर नहीं निकल पाया है। समीक्षाधीन अवधि में निगम को करीब 1.90 करोड़ रुपये का कैश लॉस दर्ज हुआ।

कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि घाटे में कुछ कमी आई है, लेकिन बढ़ती देनदारियां, नकारात्मक रिजर्व और लगातार नकदी नुकसान झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम की वित्तीय स्थिति के लिए अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

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