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झारखंड में JSSC CGL परीक्षा को लेकर चल रहा विवाद एक वायरल ऑडियो के सामने आने के बाद फिर राजनीतिक मुद्दा बन गया है। नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर यह ऑडियो साझा करते हुए झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के सचिव सुधीर गुप्ता और राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं।
मरांडी ने दावा किया कि ऑडियो उस दौर का है, जब विवादों में घिरी JSSC CGL परीक्षा के सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ने वाली थी। उनके मुताबिक, ऑडियो में कथित तौर पर सुधीर गुप्ता परीक्षा को अपनी उपलब्धि बताते हुए सुनाई दे रहे हैं। हालांकि, ऑडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इसकी प्रामाणिकता की जांच अभी बाकी है।
सरकार की भूमिका पर उठाए सवाल
वायरल रिकॉर्डिंग को आधार बनाते हुए बाबूलाल मरांडी ने JSSC सचिव पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे प्रकरण में अधिकारियों को सरकार का संरक्षण मिला और कथित आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए।
मरांडी ने राज्य सरकार से यह भी पूछा कि यदि परीक्षा से संबंधित आरोप इतने गंभीर हैं तो सुधीर गुप्ता के खिलाफ अब तक निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि जांच और विवाद के बावजूद अधिकारी को पद से हटाने अथवा उनके खिलाफ कठोर कदम उठाने में सरकार की ओर से देरी क्यों हो रही है।

छात्रों के हित में कार्रवाई की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी से प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिन अधिकारियों या अन्य लोगों की भूमिका सामने आए, उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाए।
मरांडी पहले भी JSSC CGL प्रकरण में कई अधिकारियों की भूमिका की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग कर चुके हैं।
पेपर लीक मामले की जांच कर रही CID
JSSC CGL परीक्षा पहले से ही कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को लेकर जांच के दायरे में है। मामले की जांच CID द्वारा किए जाने और इस सिलसिले में कई लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आ चुकी है। परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों से कथित तौर पर पैसे लेने और प्रश्न पहले उपलब्ध कराने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
इसी विवाद के बीच अब वायरल ऑडियो ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। हालांकि, रिकॉर्डिंग में मौजूद आवाज, बातचीत की परिस्थितियों और उसमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में ऑडियो की वास्तविकता जांच का विषय बनी हुई है।