Wednesday, October 7, 2026
Home » नामकुम अंचल में दस्तावेज गायब होने के मामले में ACB की बड़ी कार्रवाई, पूर्व CI और लिपिक गिरफ्तार

नामकुम अंचल में दस्तावेज गायब होने के मामले में ACB की बड़ी कार्रवाई, पूर्व CI और लिपिक गिरफ्तार

by उर्वशी शेखर
0 comments

झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बाद नामकुम अंचल कार्यालय से राजस्व दस्तावेजों के गायब होने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कार्रवाई तेज कर दी है। जांच एजेंसी ने मंगलवार को तत्कालीन अंचल निरीक्षक (CI) मनोज कुमार दीक्षित और तत्कालीन कार्यालय लिपिक दीपक कुमार को गिरफ्तार किया। दोनों को बुधवार को ACB की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। एजेंसी मामले में आगे पूछताछ के लिए दोनों को रिमांड पर लेने की मांग कर सकती है।

यह मामला नामकुम अंचल में दर्ज दाखिल-खारिज वाद संख्या 365 आर-27/2013-14 से जुड़ा है। इस वाद की पूरी फाइल और संबंधित सरकारी अभिलेख उपलब्ध नहीं होने की शिकायत के बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ACB को प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया था।

26 अगस्त को दर्ज हुई थी प्राथमिकी

हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में ACB ने 26 अगस्त 2026 को रांची स्थित ACB थाने में कांड संख्या 18/2026 दर्ज की। प्राथमिकी में नामकुम की तत्कालीन अंचलाधिकारी डॉ. श्वेता वर्मा, तत्कालीन CI मनोज कुमार, तत्कालीन लिपिक दीपक कुमार समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था।

जांच के दौरान ACB को मनोज कुमार दीक्षित और दीपक कुमार के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है। इसी आधार पर दोनों की गिरफ्तारी की गई। मामले में शामिल अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और उनकी गिरफ्तारी को लेकर आवश्यक कार्रवाई जारी है।

दीपक कुमार वर्तमान में रांची के LRDC कार्यालय में वरीय सहायक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि मनोज कुमार दीक्षित सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

भूमि विवाद से शुरू हुआ था मामला

मामले की शुरुआत नामकुम अंचल के डुंडु क्षेत्र की एक जमीन से जुड़े विवाद से हुई। शिकायतकर्ता थामस साइमन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि म्यूटेशन की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना था कि मामले की जांच के लिए मूल राजस्व रिकॉर्ड मांगे जाने के बावजूद संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा रहे थे।

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह भी मामला आया कि दूसरे पक्ष के नाम किए गए म्यूटेशन की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने में अंचल कार्यालय की ओर से लगातार देरी की गई। हाईकोर्ट के पूर्व निर्देशों के बावजूद जब रिकॉर्ड से जुड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो अदालत ने मामले को गंभीरता से लिया।

जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने प्रथम दृष्टया सरकारी अभिलेख गायब होने की आशंका को गंभीर मानते हुए पूरे मामले की जांच ACB को सौंप दी थी। अब जांच एजेंसी दस्तावेजों के गायब होने की परिस्थितियों, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और म्यूटेशन प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं की पड़ताल कर रही है।

You may also like

Leave a Comment