झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में दवाओं की प्रस्तावित खरीद को लेकर जदयू विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय ने सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि निविदा में कुछ कंपनियों ने अपेक्षाकृत कम कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराने की पेशकश की है, इसके बावजूद विभाग कुछ केंद्रीय सरकारी कंपनियों से अधिक दर पर खरीद की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सरयू राय के मुताबिक, इस खरीद को लेकर विभागीय स्तर पर प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है और इसे कैबिनेट के सामने मंजूरी के लिए भेजने की तैयारी है। उन्होंने कहा है कि यदि कम कीमत वाले विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद महंगी दर पर खरीद को मंजूरी मिलती है, तो इससे सरकारी धन पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी से प्रस्ताव को कैबिनेट में रखने से पहले पूरे मामले की समीक्षा करने की मांग की है। सरयू राय ने स्वास्थ्य मंत्री से खरीद प्रक्रिया से जुड़े सभी तथ्यों को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाने और दरों की तुलना समेत पूरी प्रक्रिया की जांच कराने को कहा है।

पूर्व की दवा खरीद प्रक्रियाओं का संदर्भ देते हुए सरयू राय ने वित्तीय प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि दवाओं की प्रस्तावित खरीद में कंपनियों की दरें, चयन का आधार और पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट की जाए, ताकि खरीद को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।
इधर, झारखंड में दवाओं की सरकारी आपूर्ति के लिए एक नई निविदा प्रक्रिया भी जारी है। राज्य के आधिकारिक ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर 21 सितंबर 2026 को जीएमपी प्रमाणित दवा निर्माताओं से आपूर्ति के लिए रेट कॉन्ट्रैक्ट टेंडर प्रकाशित किया गया है। इस निविदा में बोली जमा करने की अंतिम तारीख 22 अक्टूबर 2026 निर्धारित है।
दवा खरीद को लेकर उठे सवालों के बीच अब नजर इस बात पर है कि विभाग प्रस्तावित खरीद की दरों और चयन प्रक्रिया को किस तरह स्पष्ट करता है और कैबिनेट के समक्ष प्रस्ताव रखने से पहले आपत्तियों पर क्या कार्रवाई होती है।