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शेयर बाजार में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाने का सपना दिखाकर लाखों रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। रांची में Ranchi Stock Academy के नाम से शेयर मार्केट और ट्रेडिंग का प्रशिक्षण देने वाले सुनील पंडित पर कई छात्रों और निवेशकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ितों का दावा है कि पहले उन्हें शेयर बाजार में कारोबार करना सिखाया गया और बाद में ट्रेडिंग में हुए नुकसान की भरपाई कराने तथा अतिरिक्त मुनाफा दिलाने का आश्वासन देकर उनसे बड़ी रकम ली गई। पैसे वापस नहीं मिलने पर कुछ पीड़ितों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है, जबकि अन्य ने पुलिस से शिकायत की है।
पीड़ितों के मुताबिक, Ranchi Stock Academy में शुरुआत में करीब 10 से 15 छात्रों का एक बैच बनाया गया था। यहां लगभग एक सप्ताह तक शेयर बाजार की बुनियादी जानकारी दी गई। इसके बाद छात्रों को डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट खुलवाने तथा उनमें पैसे जमा करने के लिए कहा गया।
आरोप है कि प्रशिक्षण के अगले चरण में छात्रों से लाइव मार्केट में ऑप्शन ट्रेडिंग कराई गई। इस दौरान कई छात्रों को बड़ी रकम का नुकसान उठाना पड़ा। पीड़ितों का कहना है कि नुकसान होने के बाद सुनील पंडित ने कुछ छात्रों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया और उन्हें पैसे वापस दिलाने का भरोसा दिया।
नुकसान की भरपाई के साथ 10% लाभ का दिया भरोसा
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ट्रेडिंग में घाटा होने के बाद उन्हें अलग-अलग बुलाकर निवेश के नए प्रस्ताव दिए गए। उनसे कहा गया कि वे अपनी रकम सौंप दें, जिसके बाद उनके पैसे से ट्रेडिंग कर पुराने नुकसान की भरपाई की जाएगी। साथ ही करीब 10 प्रतिशत अतिरिक्त मुनाफा दिलाने का भी आश्वासन दिया गया।
पीड़ितों के अनुसार, इसी भरोसे पर कई लोगों ने लाखों रुपये दिए। आरोपों के मुताबिक, एमडी एजाज अहमद से लगभग 13 लाख रुपये, दीप बारा से पांच लाख रुपये, रोशन मौर्य से चार लाख रुपये और मोहम्मद तल्हा से करीब 32 लाख रुपये लिए गए।
इन चार लोगों की ओर से ही कुल लगभग 54 लाख रुपये दिए जाने का दावा किया गया है। इसके अलावा अन्य छात्रों और निवेशकों से भी रकम लेने के आरोप हैं। कुछ पीड़ितों ने अपने डीमैट और ट्रेडिंग खातों में भारी वित्तीय नुकसान होने की बात भी कही है।

रांची छोड़कर दिल्ली जाने का आरोप
पीड़ितों का आरोप है कि बड़ी रकम लेने के बाद सुनील पंडित रांची से दिल्ली चला गया। इसके बाद जब निवेशकों ने अपनी रकम वापस मांगी तो उन्हें कथित तौर पर बार-बार आश्वासन दिया गया, लेकिन भुगतान नहीं किया गया।
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, शुरुआत में उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि अन्य लोगों से भी इसी तरह पैसे लिए गए हैं। रकम वापस नहीं मिलने पर जब उन्होंने एक-दूसरे से संपर्क किया, तब कथित लेन-देन के कई मामले सामने आए।
इसके बाद प्रभावित लोगों ने अपने बैंक ट्रांजेक्शन और अन्य दस्तावेज जुटाकर कानूनी कार्रवाई शुरू की।
पैसे लौटाने के लिए दिए चेक भी बाउंस
मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब कुछ पीड़ितों को रकम वापस करने के लिए दिए गए चेक कथित तौर पर बैंक से अनादरित हो गए। इसके बाद शिकायतकर्ताओं ने अदालत और पुलिस की शरण ली।
पीड़ितों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, एमडी एजाज अहमद ने चेक बाउंस से संबंधित मामले में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत शिकायत वाद संख्या 24051/2026 दाखिल किया है। वहीं, रोशन मौर्य की ओर से न्यायालय में आपराधिक वाद संख्या 18876/2026 दायर किए जाने की बात कही गई है।
मोहम्मद तल्हा की शिकायत पर लालपुर थाने में कांड संख्या 02/2026 दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। अन्य प्रभावित लोगों ने भी विभिन्न थानों में लिखित शिकायत देने का दावा किया है। हालांकि, इन मामलों की वर्तमान कानूनी स्थिति और पुलिस की ओर से अब तक की गई कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनके पास कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई दस्तावेज मौजूद हैं। इनमें बैंक खातों से किए गए भुगतान, यूपीआई ट्रांजेक्शन, व्हाट्सऐप पर हुई बातचीत, ट्रेडिंग अकाउंट के रिकॉर्ड और भुगतान के लिए दिए गए चेक शामिल हैं।
इसके अलावा चेक बाउंस होने से संबंधित बैंक मेमो, तस्वीरें और वीडियो भी उपलब्ध होने का दावा किया गया है। पीड़ित चाहते हैं कि जांच एजेंसियां इन दस्तावेजों की पड़ताल कर पूरे मामले में हुए वित्तीय लेन-देन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें।
DGP और मुख्यमंत्री सचिवालय तक पहुंचाई शिकायत
पीड़ितों ने पुलिस की कार्रवाई की गति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शिकायत दर्ज कराने और लेन-देन से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने पुलिस महानिदेशक, रांची के एसएसपी, सिटी एसपी और डीएसपी सहित मुख्यमंत्री सचिवालय तक अपनी शिकायत पहुंचाई है। इसके बावजूद उन्हें अब तक संतोषजनक कार्रवाई होने की जानकारी नहीं मिली है।
प्रभावित लोगों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने के साथ आरोपी से जुड़े सभी बैंक खातों, डीमैट अकाउंट और ट्रेडिंग खातों की वित्तीय गतिविधियों की पड़ताल करने की मांग की है। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान और अन्य लेन-देन की जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि कितने लोगों से कुल कितनी रकम ली गई।
फिलहाल, सुनील पंडित के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में आरोपी पक्ष और पुलिस का विस्तृत आधिकारिक बयान भी सामने आना बाकी है। आरोपों की सत्यता और कथित वित्तीय लेन-देन की वास्तविक स्थिति जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।