Tuesday, October 6, 2026
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इनामी नक्सली असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद तेज होगी कानूनी कार्रवाई, स्पीडी ट्रायल की तैयारी

by उर्वशी शेखर
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लंबे समय से झारखंड पुलिस के लिए चुनौती बने रहे एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली कमांडर असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद अब उसके खिलाफ लंबित मामलों को अदालत में तेजी से आगे बढ़ाने की कवायद शुरू हो गई है। पश्चिम बंगाल से पकड़े गए असीम मंडल पर झारखंड, पश्चिम बंगाल और आसपास के क्षेत्रों में हिंसक नक्सली गतिविधियों से जुड़े कुल 55 मामले दर्ज बताए जाते हैं। झारखंड सरकार ने उस पर एक करोड़ रुपये, जबकि ओडिशा सरकार ने एक करोड़ 20 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।

झारखंड पुलिस के आईजी अभियान सह प्रवक्ता नरेंद्र सिंह के अनुसार, असीम मंडल के खिलाफ दर्ज मामलों में हत्या, हत्या की साजिश, हथियारों के इस्तेमाल और प्रतिबंधित नक्सली गतिविधियों से संबंधित गंभीर आरोप शामिल हैं। पुलिस अब इन मामलों की केसवार समीक्षा कर रही है, ताकि जिन प्रकरणों में आरोप पत्र दाखिल हो चुके हैं, उनमें अभियोजन पक्ष प्रभावी ढंग से पैरवी कर सके और सुनवाई जल्द पूरी कराई जा सके।

सुनील महतो हत्याकांड भी जांच के केंद्र में

असीम मंडल के खिलाफ कार्रवाई में सबसे अहम कड़ियों में झामुमो के तत्कालीन सांसद सुनील कुमार महतो की हत्या और सुरक्षा बलों के जवानों की हत्या से जुड़े मामले बताए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, जनप्रतिनिधियों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की साजिशों में असीम की भूमिका की जांच की गई है।

सुनील महतो हत्याकांड ने पूर्वी सिंहभूम में उस समय सनसनी फैला दी थी। फुटबॉल मैच के दौरान मैदान में पहुंचे सांसद पर हथियारबंद नक्सलियों ने हमला किया था। गोलीबारी में सांसद के अलावा उनके सुरक्षा में तैनात दो बॉडीगार्ड और एक झामुमो नेता की भी मौत हुई थी। इस घटना के बाद मामले की जांच में कई नक्सलियों के नाम सामने आए और समय-समय पर गिरफ्तारियां तथा आत्मसमर्पण होते रहे।

सरेंडर करने वाले नक्सली बन सकते हैं अहम गवाह

पुलिस के लिए असीम मंडल के दस्ते से जुड़े रहे नक्सलियों की भूमिका अब महत्वपूर्ण हो सकती है। उसके संगठन से जुड़े कई सदस्य या तो गिरफ्तार किए जा चुके हैं या बाद में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर चुके हैं। ऐसे लोगों के बयान अभियोजन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

सुनील महतो हत्याकांड में राहुल उर्फ रंजीत पाल, उसकी पत्नी, शकुंतला महतो उर्फ पुष्पा और रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन के नाम सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार राहुल और उसकी पत्नी ने जनवरी 2017 में पश्चिम बंगाल पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। शकुंतला पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था और उसने जून 2026 में बंगाल पुलिस के सामने सरेंडर किया। वहीं रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन ने सितंबर 2026 में पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा में आत्मसमर्पण किया।

इसके अलावा राजेंद्र मुंडा उर्फ राजेंद्र सिंह को पुलिस ने दिसंबर 2017 में गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान उसका नाम भी सुनील महतो हत्याकांड से जोड़ा गया। जयंती समेत कुछ अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस को कथित साजिश और नेटवर्क से संबंधित जानकारी मिली थी।

असीम के खिलाफ 55 मामले, अब अदालत में मजबूत पैरवी पर जोर

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि असीम मंडल की गिरफ्तारी को केवल एक नक्सली कमांडर की गिरफ्तारी के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। उसके खिलाफ लंबित मामलों में उपलब्ध दस्तावेज, गवाह और अन्य साक्ष्यों को एकत्र कर अभियोजन पक्ष को मजबूत करने की तैयारी है।

जिन मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, उनमें सुनवाई को गति देने के लिए स्पीडी ट्रायल की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। पुलिस उन मामलों में भी गवाहों और पूर्व में गिरफ्तार अथवा आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों के बयानों को अहम मान रही है, जिनमें असीम की कथित भूमिका की जांच चल रही है।

बेसरा के बाद संगठन में अहम रणनीतिक भूमिका

आईजी अभियान नरेंद्र सिंह के मुताबिक, असीम मंडल माओवादी संगठन के महत्वपूर्ण रणनीतिकारों में शामिल रहा है। पुलिस का दावा है कि बेसरा के बाद संगठन में उसकी भूमिका काफी प्रभावशाली थी। अब पूछताछ के जरिए उसके नेटवर्क, पुराने संपर्कों और विभिन्न हिंसक घटनाओं से जुड़ी कड़ियों की जानकारी जुटाने की कोशिश होगी।

असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने अब दोहरी चुनौती है; एक ओर उसके नेटवर्क और पूर्व गतिविधियों से जुड़े तथ्यों को सामने लाना और दूसरी ओर उसके खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों को कानूनी प्रक्रिया के जरिए निर्णायक चरण तक पहुंचाना।

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