Wednesday, October 7, 2026
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गोड्डा : करम परब का भावपूर्ण समापन, करम डाली और टुपा का विसर्जन कर बहनों ने दी विदाई

by उर्वशी शेखर
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गोड्डा प्रखंड के पथरिया घाट स्थित महतो टोला में करम परब का समापन पारंपरिक कुड़माली रीति-रिवाजों के साथ हुआ। पर्व के अंतिम दिन उपवास रखने वाली महिलाओं और युवतियों ने देर रात विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद पूरी रात करम गीतों और नृत्य का दौर चलता रहा। इस दौरान जावा को जगाने की परंपरा भी निभाई गई।

रातभर चले धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद तड़के गांव के अंतिम छोर पर स्थित छोटे पोखर में करम डाली और टुपा का विसर्जन किया गया। विदाई के इस अवसर पर व्रती बहनों की आंखें नम रहीं। विसर्जन के दौरान पारंपरिक गीत गाते हुए करम गोसाईं को अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण दिया गया।

पारंपरिक गीत-नृत्य के साथ निभाई गई रस्में

करम परब के दौरान स्थानीय परंपराओं और कुड़माली संस्कृति की झलक देखने को मिली। पूजा के बाद रातभर सामूहिक गीत और नृत्य के जरिए पर्व का उत्सव मनाया गया। जावा को जगाने की रस्म के साथ महिलाओं और युवतियों ने करम पर्व की धार्मिक मान्यताओं को आगे बढ़ाया।

कार्यक्रम में कविता महतो, प्यासी कुमारी, नंदनी महतो, कुंती कुमारी, काजल कुमारी, खुशबू कुमारी, दिव्या कुमारी, वंदना भारती, पूजा कुमारी, नूतन कुमारी, शीला कुमारी, शिवानी महतो, खुशी महतो, सरस्वती महतो और लवली कुमारी सहित कई करमैती शामिल रहीं। वहीं सुभाष महतो, गौतम कुमार महतो, मेघनाद महतो, जवाहर महतो, पप्पू कुमार, मनीलाल महतो, कमलेश महतो और टुनटुन कुमार समेत अन्य ग्रामीण भी मौजूद रहे।

करम पर्व को राष्ट्रीय सांस्कृतिक पर्व का दर्जा देने की मांग

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने करम परब को राष्ट्रीय सांस्कृतिक पर्व के रूप में मान्यता देने की मांग उठाई। साथ ही स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को करम पर्व की परंपरा, सामाजिक महत्व और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने की अपील की गई।

ग्रामीणों का कहना है कि करम परब केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति, सामुदायिक एकता और लोक संस्कृति से जुड़ी महत्वपूर्ण परंपरा है। इसलिए नई पीढ़ी तक इसकी विरासत पहुंचाना जरूरी है।

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