Tuesday, October 6, 2026
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DSPMU के दीक्षांत समारोह में 6415 विद्यार्थियों को मिली डिग्री, सुकन्या हेंब्रम को हड़िया पर शोध के लिए पीएचडी

by उर्वशी शेखर
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रांची के मोरहाबादी स्थित रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत मंडप में गुरुवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) का तीसरा दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। समारोह में राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने दीक्षांत शोभायात्रा में भी हिस्सा लिया। इस अवसर पर अलग-अलग पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को डिग्री और स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।

इस बार दीक्षांत समारोह में कुल 6415 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। इनमें 3350 छात्राएं और 3065 छात्र शामिल हैं। विभिन्न विषयों में सर्वोच्च प्रदर्शन करने वाले 142 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल मिला। स्वर्ण पदक हासिल करने वालों में 93 छात्राएं और 49 छात्र हैं। वहीं, विश्वविद्यालय के 20 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।

हड़िया पर शोध के लिए सुकन्या हेंब्रम को पीएचडी

पीएचडी प्राप्त करने वाले शोधार्थियों में सुकन्या हेंब्रम का शोध विशेष रूप से स्थानीय और पारंपरिक विषय से जुड़ा रहा। उन्होंने झारखंड की पारंपरिक हड़िया को अपने अध्ययन का केंद्र बनाया।

सुकन्या ने अपने शोध में जनजातीय समाज में हड़िया से जुड़े सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं का अध्ययन किया। इसमें पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में इसके इस्तेमाल, इससे संबंधित पारंपरिक मान्यताओं तथा सामाजिक जीवन में इसकी भूमिका को समझने का प्रयास किया गया। हड़िया के विभिन्न गुणों पर भी शोध किया गया है। इस अध्ययन के लिए उन्हें दीक्षांत समारोह में पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।

डॉ. राकेश मोहन को पहली बार मानद डी.लिट.

समारोह के विशिष्ट अतिथि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य और भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर डॉ. राकेश मोहन रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को दीक्षांत संबोधन दिया।

डीएसपीएमयू की ओर से पहली बार डॉ. राकेश मोहन को मानद डी.लिट. की उपाधि प्रदान की गई। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।

राज्यपाल ने कहा- डिग्री के साथ बढ़ती है जिम्मेदारी

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक प्रमाणपत्र हासिल करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थी जीवन के एक महत्वपूर्ण चरण के पूर्ण होने का प्रतीक भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी शिक्षा और अर्जित ज्ञान का उपयोग समाज तथा देश की प्रगति के लिए करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि शिक्षा पूरी करने के साथ युवाओं की जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं। विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल और नैतिक मूल्यों को साथ लेकर अपने भविष्य का निर्माण करना चाहिए।

वहीं डॉ. राकेश मोहन ने अपने दीक्षांत संबोधन में विद्यार्थियों को बदलती परिस्थितियों और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से हासिल ज्ञान का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका लाभ व्यापक समाज और राष्ट्र को भी मिलना चाहिए।

गोल्ड मेडल पाकर विद्यार्थियों में खुशी

स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए समारोह यादगार रहा। गोल्ड मेडलिस्टों ने अपनी सफलता के पीछे नियमित मेहनत के साथ शिक्षकों और परिवार के सदस्यों के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। विद्यार्थियों ने अपनी उपलब्धि का श्रेय शिक्षकों, अभिभावकों और परिजनों को दिया।

कुलपति प्रो. राजीव मनोहर के कार्यकाल का पहला दीक्षांत

कुलपति प्रो. राजीव मनोहर के कार्यकाल में यह पहला दीक्षांत समारोह था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम के लिए व्यापक तैयारियां की थीं। समारोह में सत्र 2024-26 के पीजी विद्यार्थियों को भी शामिल किया गया।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, परीक्षा और परिणाम से जुड़ी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने में परीक्षा विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण रही। डिग्री और मेडल प्राप्त करने के दौरान विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। कई विद्यार्थियों ने इस उपलब्धि को अपनी शैक्षणिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।

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